स्वभावो नोपदेशेन

स्वभावो नोपदेशेन शक्यते कर्तुमन्यथा ।
सुतप्तमपि पानीयं पुनर्गच्छति शीतताम् ॥

 

किसी के स्वभाव को समझाकर बदला नहीं जा सकता।
पानी को जितना भी उबाल लो​, वह वापस ठंडा हो ही जाता है।

 

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bicff
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वेदधारा की सेवा समाज के लिए अद्वितीय है 🙏 -योगेश प्रजापति

वेदधारा ने मेरी सोच बदल दी है। 🙏 -दीपज्योति नागपाल

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अक्षौहिणी का अर्थ क्या है?

२१,८७० रथ, २१,८७० हाथी, ६५, ६१० घुड़सवार एवं १,०९,३५० पैदल सैनिकों के समूह को अक्षौहिणी कहते हैं।

कर्म के अनुसार ही अनुभव

कोई भी अनुभव बिना कारण का नहीं होता। श्रीराम जी मानते थे कि कौसल्या माता ने पूर्व जन्म में किसी माता के अपने पुत्र से वियोग करवाया होगा। इसलिए उनको इस जन्म में पुत्र वियोग सहना पडा।

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सांसारिक अपेक्षाओं के लिये इनमें से किसकी पूजा करनी चाहिये ?
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