स्वभावो नोपदेशेन

स्वभावो नोपदेशेन

स्वभावो नोपदेशेन शक्यते कर्तुमन्यथा ।
सुतप्तमपि पानीयं पुनर्गच्छति शीतताम् ॥

 

किसी के स्वभाव को समझाकर बदला नहीं जा सकता।
पानी को जितना भी उबाल लो​, वह वापस ठंडा हो ही जाता है।

 

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