साधूनां दुर्जनाद् भयम्

श्लोक:
पादपानां भयं वातात् पद्मानां शिशिराद् भयम् ।
पर्वतानां भयं वज्रात् साधूनां दुर्जनाद् भयम् ।।

अर्थ:

• पेड़ों को हवा से भय होता है।
• कमलों को ठंड (शीत) से भय होता है।
• पर्वतों को वज्रायुध से भय होता है।
• उसी प्रकार सज्जन लोगों को दुर्जनों से भय होता है।

व्याख्या:
जिस प्रकार तेज हवा पेड़ों को गिरा सकती है, ठंड कमल को मुरझा सकती है, और वज्रायुध पर्वत को भी मिट्टी में मिला सकता है, उसी तरह दुर्जन व्यक्ति सज्जनों के लिए सबसे बड़ा खतरा होते हैं।
दुर्जन व्यक्ति सीधे आक्रमण नहीं करते, बल्कि अपने छल, कटु वचन, और बुरे कर्मों से सज्जनों को कष्ट देते हैं। सज्जन व्यक्ति स्वभाव से शांत, दयालु और धर्मनिष्ठ होते हैं, इसलिए वे संघर्ष से बचना चाहते हैं। यही कारण है कि उनका सबसे बड़ा भय दुर्जनों से होता है।

जीवन का संदेश:
संसार में सबसे खतरनाक शक्ति हमेशा भौतिक नहीं होती। बुरे लोगों का संग, अच्छे व्यक्ति के जीवन, सम्मान और शांति को नष्ट कर सकता है। इसलिए दुर्जनों से सावधान रहना और सज्जनों का संग करना ही बुद्धिमानी है।

1. इस श्लोक में सज्जनों की तुलना पेड़, कमल और पर्वत से क्यों की गई है?
क्योंकि ये तीनों प्रकृति की श्रेष्ठ और उपयोगी रचनाएँ हैं। पेड़ दूसरों को छाया देते हैं, कमल सौंदर्य देता है, और पर्वत स्थिरता का प्रतीक है। उसी प्रकार सज्जन व्यक्ति समाज को शांति, ज्ञान और सहारा देते हैं।

2. सज्जन व्यक्ति को दुर्जनों से ही भय क्यों होता है?
सज्जन व्यक्ति किसी का अहित नहीं चाहता। वह सत्य और धर्म के मार्ग पर चलता है। लेकिन दुर्जन व्यक्ति बिना कारण भी हानि पहुँचाते हैं। उनके छल, झूठ और कटु वचन सज्जनों की शांति और सम्मान को चोट पहुँचाते हैं।

3. इस श्लोक का मुख्य जीवन-संदेश क्या है?
हर व्यक्ति की कोई न कोई कमजोरी होती है। सज्जनों के लिए सबसे बड़ा खतरा दुर्जनों का संग है। इसलिए जीवन में दुर्जनों से दूरी और सज्जनों का साथ ही सुरक्षा और उन्नति का मार्ग है।

4. क्या सज्जनों को दुर्जनों से डरना चाहिए या सावधान रहना चाहिए?
डरना नहीं, लेकिन सावधान रहना चाहिए। सज्जनता का अर्थ कमजोरी नहीं है। इसका अर्थ है विवेक के साथ सही लोगों का संग चुनना और गलत लोगों से दूरी बनाए रखना।

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