परमवीर चक्र से सम्मानित मानद कैप्टन बाना सिंह के बारे में जानिए

सियाचेन के बारे में दूर बैठकर बात करना आसान है।
समुद्र तट से इक्कीस हजार फीट से अधिक ऊंचाई पर है सियाचेन।
बर्फानी हवाएं 40 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलती रहती हैं।
-50 डिग्री तक का तापमान।
यह हिमनद लगभग 70 किमी लंबा है।

और विश्व का दूसरा सबसे बड़ा हिमनद है।
सियाचेन विश्व का सबसे ऊंचा युद्ध क्षेत्र भी है।
सियाचेन इसलिए बहुत ही महत्वपूर्ण है कि यहां भारत, पाकिस्तान और चीन की सीमाएं मिलती हैं।
पाक अधिकृत कश्मीर भारत का वह इलाका है जिसके ऊपर पाकिस्तान ने 1947 में हमला किया था और अपने कब्जे में कर लिया था।
1962 में पाकिस्तान ने बाल्टिस्तान की शक्सगम घाटी क्षेत्र चीन को सौंप दिया था, जो अवैध था क्योंकि यह भी भारत का ही है। यह इलाका 5180 वर्ग किलोमीटर का है।
इसके बाद सियाचेन, विशेष करके साल्तोरो पर्वतमाला, पाकिस्तान और चीन के बीच एक खूंटा जैसा बन गया।
अगर यह नहीं रहा तो पाकिस्तान पश्चिम से, चीन पूर्व से, और दोनों मिलकर उत्तर से लद्दाख पर आक्रमण कर सकते हैं।

1971 का भारत–पाकिस्तान युद्ध को समाप्त करने जो शिमला समझौता हुआ, जिसके अनुसार जम्मू-कश्मीर में भारत और पाकिस्तान द्वारा नियंत्रित क्षेत्रों के बीच जो नियंत्रण रेखा निर्धारित की गयी थी, उसका उत्तरतम बिंदु है NJ9842। इसके उत्तर में है सियाचेन हिमानी।
सियाचेन के बारे में शिमला समझौते में स्पष्टता नहीं थी।
लेकिन तब से पाकिस्तान सियाचेन को अपने कब्जे में लाने का प्रयास करता रहा क्योंकि पाकिस्तान और चीन एक साथ होकर भारत की सीमा तक आ सकते हैं। इसके लिए सियाचेन एक बाधा है।

पाकिस्तान सियाचेन में विदेशी पर्वतारोहियों को बुलाता रहा। पाकिस्तान और कुछ विदेशी राज्यों के मानचित्रों में सियाचेन एक बिंदु-रेखा द्वारा पाकिस्तान का इलाका जैसा दिखाया जाने लगा। पाकिस्तान का प्रयास दुनिया के सामने यह दिखाने का था कि सियाचेन उनका है।
कुछ ही समय में पाकिस्तान सेना ने अपने सैनिकों को आदेश दे दिया कि सियाचेन में भारतीय सीमा के अंदर अपनी एक चौकी खड़ी करें। उन्होंने चौकी खड़ी की और उसे कायद चौकी नाम भी दे दिया। यह चौकी एक दुर्ग जैसी थी, इसके दोनों तरफ 1500 फीट ऊंची बर्फ की दीवारें थीं। भारत की सीमा के अंदर पाकिस्तान की चौकी, अगर यह अतिक्रमण नहीं है तो क्या है। इसको वहां से हटाना भारत के लिए जरूरी बन गया।

बाना सिंह, जो उस समय नायब सूबेदार रैंक के थे, वे इसके लिए खुद आगे बढ़कर आए। सोचिए 1900 फीट की बर्फ की दीवारें, -30 डिग्री का तापमान, 50 किमी की बर्फानी हवा, खतरनाक हिमस्खलन कभी भी हो सकता है। सोचिए, हमारे जवान हमारी सुरक्षा के लिए, हम में से प्रत्येक की सुरक्षा के लिए कैसे अपने आप को अर्पित किए हुए रहते हैं। क्या हम दिन में एक बार भी उनके बारे में सोचते हैं।

बाना सिंह जी से पहले जो कोशिश की गयी थी वह असफल हो गयी थी। बाना सिंह जी और उनके चार साथी अंधेरे का फायदा उठाते हुए दीवार पर चढ़ने लगे। रास्ते में उन्हें उन शहीदों के शरीर भी मिले जिन्होंने पहले के प्रयास में देश के लिए अपना प्राण गंवाया था। ऊपर पहुंचकर उन्हें पता चला कि वहां एक बंकर बना हुआ था जिसके अंदर पाकिस्तान के स्पेशल सर्विस ग्रुप के कमांडोज थे। उन्होंने अपनी टीम को दो दिशाओं में तैनात किया और बाना सिंह जी और उनके साथियों ने ग्रेनेड और बेयोनेट से सबको खत्म कर दिया और उस शिखर पर अपना नियंत्रण स्थापित किया। इसके बाद वह शिखर बाना टॉप नाम से जाना जाता है। बाना सिंह जी को परम वीर चक्र से सम्मानित किया गया।

उनके citation में ऐसा लिखा है:
'Naib Subedar Bana Singh volunteered to be a member of a task force constituted in June 1987 to clear an intrusion by an adversary in the Siachen Glacier area at an altitude of 21,000 feet. The post was virtually an impregnable glacier fortress with ice walls, 1500 feet high, on both sides. Naib Subedar Bana Singh led his men through an extremely difficult and hazardous route. He inspired them by his indomitable courage and leadership. The brave Naib Subedar and his men crawled and closed in on the adversary. Moving from trench to trench, lobbing hand grenades and charging with the bayonet, he cleared the post of all intruders.
Nb Subedar Bana Singh displayed the most conspicuous gallantry and leadership under the most adverse conditions.'

ऐसे-ऐसे महान योद्धाओं के बारे में अगर नहीं जाना तो हम किस आवाज़ से कह सकते हैं कि हम भारतवासी हैं।

हिन्दी

हिन्दी

जय हिंद

Click on any topic to open

0

Copyright © 2026 | Vedadhara | All Rights Reserved. | Designed & Developed by Claps and Whistles
| | | | |
Vedahdara - Personalize

We use cookies