नन्हीं चींटी और दयालु हाथी

नन्हीं चींटी और दयालु हाथी

​एक विशाल जंगल में गजेंद्र नाम का एक हाथी रहता था। वह बहुत ही नेक दिल था और हमेशा दूसरे जानवरों की मदद करता था। एक दिन, जब गजेंद्र नदी के किनारे टहल रहा था, उसने देखा कि एक छोटी सी चींटी पानी के तेज़ बहाव में बहती जा रही है।

​गजेंद्र ने तुरंत अपनी सूंड से पेड़ की एक टहनी तोड़ी और उसे नदी में डाल दिया। वह चींटी किसी तरह संघर्ष करते हुए उस टहनी पर चढ़ गई और उसकी जान बच गई। किनारे पर पहुँचकर चींटी ने कहा, 'बहुत-बहुत धन्यवाद गजेंद्र! मैं तुम्हारी इस मदद को कभी नहीं भूलूँगी।'

​हाथी ने मुस्कुराते हुए कहा, 'कोई बात नहीं मित्र, यह तो एक छोटी सी मदद थी,' और वह वहां से चला गया।

​कुछ दिनों बाद, एक शिकारी ने जंगल में एक बड़ा जाल बिछाया और उसे पत्तों से ढंक दिया। गजेंद्र अनजाने में उसी दिशा में बढ़ रहा था। चींटी ने यह देख लिया।

​उसने यह नहीं सोचा कि हाथी कितना विशाल है और वह खुद कितनी छोटी। इससे पहले कि गजेंद्र जाल पर पैर रखता, चींटी तेज़ी से दौड़कर गई और शिकारी के पैर में ज़ोर-ज़ोर से काटने लगी!

​शिकारी दर्द के मारे चिल्ला उठा, 'आह! बचाओ!' उसकी आवाज़ सुनकर गजेंद्र सतर्क हो गया और रुक गया। उसने अपने सामने बिछा जाल देखा और उसे एहसास हुआ कि वह बाल-बाल बच गया है।

कहानी की सीख:

​हाथी द्वारा की गई मदद केवल एक छोटी टहनी डालने की थी, लेकिन वह चींटी बहुत ही संस्कारी और आभारी थी। इसलिए, उसने अपनी जान की परवाह किए बिना हाथी को बचाने का फैसला किया।

​हाथी की वह 'छोटी' सी मदद, चींटी के अच्छे स्वभाव के कारण एक 'बड़ी' जान बचाने वाली मदद बन गई।

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