दुर्गा सप्तशती - रात्रि सूक्त

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अच्छा मंत्र, इसकी ऊर्जा महसूस कर रहा हूँ! 😊 -जयप्रकाश कुमार

बहुत बहुत धन्यवाद -User_se0353

वेदधारा की धर्मार्थ गतिविधियों का हिस्सा बनकर खुश हूं 😇😇😇 -प्रगति जैन

यह मंत्र मेरे मन को शांति देता है। 🕉️ -riya singh

🧘‍♂️ आपके मंत्रों को सुनना मेरे लिए एक रिवाज बन गया है। -रोहन त्रिपाठी

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गोवत्स द्वादशी की कहानी क्या है?

एक बार माता पार्वती गौ माता के और भोलेनाथ एक बूढे के रूप में भृगु महर्षि के आश्रम पहुंचे। गाय और बछडे को आश्रम में छोडकर महादेव निकल पडे। थोडी देर बाद भोलेनाथ खुद एक वाघ के रूप में आकर उन्हें डराने लगे। डर से गौ और बछडा कूद कूद कर दौडे तो उनके खुरों का निशान शिला के ऊपर पड गया जो आज भी ढुंढागिरि में दिखाई देता है। आश्रम में ब्रह्मा जी का दिया हुआ एक घंटा था जिसे बजाने पर भगवान परिवार के साथ प्रकट हो गए। इस दिन को गोवत्स द्वादशी के रूप में मनाते हैं।

क्षीरसागर की उत्पत्ति कैसे हुई?

रसातल में रहनेवाली सुरभि के दूध की धारा से क्षीरसागर उत्पन्न हुआ। क्षीरसागर के तट पर रहने वाले फेनप नामक मुनि जन इसके फेन को पीते रहते हैं।

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इलापुरे रम्याविशालकेऽस्मिन् समुल्लसन्तं च जगद्वरेण्यम्।वन्दे महोदारतरस्वभावं घुश्मेश्वराख्यं शरणं प्रपद्ये।। आदिशंकराचार्य द्वारा विरचित यह श्लोक किसकी स्तुति है ?

रात्रीति सूक्तस्य उषिक-ऋषिः। रात्रिर्देवता । गायत्री छन्दः । श्रीजगदम्बाप्रीत्यर्थे सप्तशतीपाठादौ जपे विनियोगः । ओं रात्री व्यख्यदायती पुरुत्रा देव्यक्षभिः । विश्वा अधि श्रियोऽधित ॥१॥ ओर्वप्रा अमर्त्या निवतो दे....

रात्रीति सूक्तस्य उषिक-ऋषिः। रात्रिर्देवता । गायत्री छन्दः । श्रीजगदम्बाप्रीत्यर्थे सप्तशतीपाठादौ जपे विनियोगः ।
ओं रात्री व्यख्यदायती पुरुत्रा देव्यक्षभिः ।
विश्वा अधि श्रियोऽधित ॥१॥
ओर्वप्रा अमर्त्या निवतो देव्युद्वतः ।
ज्योतिषा बाधते तमः ॥२॥
निरु स्वसारमस्कृतोषसं देव्यायती ।
अपेदु हासते तमः ॥३॥
सा नो अद्य यस्या वयं नि ते यामन्नविक्ष्महि ।
वृक्षे न वसतिं वयः ॥४॥
नि ग्रामासो अविक्षत नि पद्वन्तो नि पक्षिणः ।
नि श्येनासश्चिदर्थिनः ॥५॥
यावया वृक्यं वृकं यवय स्तेनमूर्म्ये ।
अथा नः सुतरा भव ॥६॥
उप मा पेपिशत्तमः कृष्णं व्यक्तमस्थित ।
उष ऋणेव यातय ॥७॥
उप ते गा इवाकरं वृणीष्व दुहितर्दिवः ।
रात्रि स्तोमं न जिग्युषे ॥८॥

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