तथात्मा गुणदोषयोः

आरोप्यते शिला शैले यत्नेन महता यथा |
पात्यते तु क्षणेनाधस्तथात्मा गुणदोषयोः ||

 

जिस प्रकार एक पर्वत के ऊपर एक बडे पत्थर को लेकर जाना कठिन है वैसे ही अपने आप में एक अच्छे गुण को लेकर आना भी कठिन होता है | इस के लिए हमें बहुत प्रयत्न करना पडता है | और अपने आप में एक दोष को लेकर आना तो इतना आसान होता है जैसा एक पत्थर को पर्वत के शिखर से धक्का देकर नीचे गिराना | इस के लिए कोई प्रयत्न नहीं लगता | इस लिए प्रयत्न करते हुए अपने आप में अच्छे गुणों का अभिवर्धन करें |

 

Copyright © 2024 | Vedadhara | All Rights Reserved. | Designed & Developed by Claps and Whistles
| | | | |