अज्ञः सुखमाराध्यः

अज्ञः सुखमाराध्यः सुखतरमाराध्यते विशेषज्ञः|

ज्ञानलवदुर्विदग्धं ब्रह्मापि तं नरं न रञ्जयति|
 
जो अज्ञानी व्यक्ति होता है, उस को समझाना आसान होता है| जो ज्ञानी व्यक्ति होता है, उस को समझाना बहुत आसान होता है| पर जो आधा-अधूरा जानते हुए भी अपने आप को बहुत बडा पंडित समझता है, उस को भगवान ब्रह्मा भी कोई बात समझा नहीं सकते|
 
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Comments

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आपको नमस्कार 🙏 -राजेंद्र मोदी

Om namo Bhagwate Vasudevay Om -Alka Singh

Ram Ram -Aashish

प्रणाम गुरूजी 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏 -प्रभास

बहुत बढिया चेनल है आपका -Keshav Shaw

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गोदान की विधि

सुपुष्ट सुंदर और दूध देने वाली गाय को बछडे के साथ दान में देना चाहिए। न्याय पूर्वक कमायी हुई धन से प्राप्त होनी चाहिए गौ। कभी भी बूढी, बीमार, वंध्या, अंगहीन या दूध रहित गाय का दान नही करना चाहिए। गाय को सींग में सोना और खुरों मे चांदी पहनाकर कांस्य के दोहन पात्र के साथ अच्छी तरह पूजा करके दान में देते हैं। गाय को पूरब या उत्तर की ओर मुह कर के खडा करते हैं और पूंछ पकडकर दान करते हैं। स्वीकार करने वाला जब जाने लगता है तो उसके पीछे पीछे आठ दस कदम चलते हैं। गोदान का मंत्र- गवामङ्गेषु तिष्ठन्ति भुवनानि चतुर्दश। तस्मादस्याः प्रदानेन अतः शान्तिं प्रयच्छ मे।

दिव्य चक्षु

सबके अन्दर दिव्य चक्षु विद्यमान है। इस दिव्य चक्षु से ही हम सपनों को देखते हैं। पर जब तक इसका साधना से उन्मीलन न हो जाएं इससे बाहरी दुनिया नहीं देख सकते।

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