सांसारिक दुखों से मुक्ति और दिव्य शरण के लिए श्रीकृष्ण मंत्र

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सांसारिक दुखों से मुक्ति और दिव्य शरण के लिए श्रीकृष्ण मंत्र

श्रीकृष्ण रुक्मिणीकान्त गोपीजनमनोहर ।

संसारसागरे मग्नं मामुद्धर समुद्धर ।। 

यह मंत्र एक अत्यंत भावपूर्ण प्रार्थना है, जिसमें भक्त भगवान श्रीकृष्ण से अपनी रक्षा और उद्धार की विनती करता है।

श्रीकृष्ण रुक्मिणीकान्त गोपीजनमनोहर
हे श्रीकृष्ण! आप रुक्मिणी के प्रिय पति हैं, और गोपियों के मन को मोह लेने वाले हैं। आप सबके हृदय को आकर्षित करने वाले, परम करुणामय और सुंदर स्वरूप वाले हैं।

संसारसागरे मग्नं मामुद्धर समुद्धर
मैं इस संसार रूपी गहरे समुद्र में डूबा हुआ हूँ, दुखों और परेशानियों में फंसा हुआ हूँ। हे प्रभु! कृपा करके मुझे इस संसार से पार निकालिए, मेरा उद्धार कीजिए, मुझे अपनी शरण में ले लीजिए।

यह मंत्र भक्त के पूर्ण समर्पण और भगवान से सहायता की पुकार को दर्शाता है — जब मनुष्य अपने आप को असहाय महसूस करता है, तब वह श्रीकृष्ण की शरण में जाकर उनसे मार्गदर्शन और मुक्ति की प्रार्थना करता है।


क्या इस मंत्र को सुनने के लिए दीक्षा आवश्यक है?

नहीं। दीक्षा केवल तब आवश्यक होती है जब आप मंत्र साधना करना चाहते हैं, सुनने के लिए नहीं।

लाभ प्राप्त करने के लिए बस हमारे द्वारा दिए गए मंत्रों को सुनना पर्याप्त है।

Ramaswamy Sastry and Vighnesh Ghanapaathi

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