जेहि जन परममता अतिजोहु जेहि करुणा करिकीनह नकोहु गई बहोर गरीबनेवाजु सरलसबलसाहिबरगुराजु तुलसीदास जी कहते हैं, जिसके हृदय में अपने दास पर ममता और दया है, जिसने करुणा करके फिर क्रोध नहीं किया। जो गई हुई वस्तु को दिलानेवाले गरीब निवाज, सरल, सबल, साहिब, और गुरु राजू हैं। वही श्रीरामचंद्र जी भगवान, आती छोह हैं। इसके कारण ही वे भक्त को शरणागत होते ही स्वीकार करते हैं और उसके सभी अपराध भूल जाते हैं। भगवान जिस पर ममता और छोह करते हैं, उस पर कभी क्रोध नहीं करते। क्रोध न करने का कारण क्या है? भगवान की पूर्ण समर्थता। क्योंकि कम सामर्थ्य होने से ही क्रोध होता है और ममता के कारण भगवान सोचते हैं, 'यह मेरा है, यह भक्त मेरा है और मुझे ही संभालना है।' यदि कोई कुछ अपराध करें, तो भगवान सोचते हैं, 'मेरे ध्यान न देने पर ही ऐसा हुआ है। यह उसका दोष नहीं है।' उनमें जो करुणा का गुण है, वही दूसरे के दुख को दूर करने की प्रेरणा करता रहता है।
गई बहुर राजा दशरथ का कुल जा रहा था, भगवान ने उस कुल में जन्म लेकर उसे संजीवित किया। विश्वामित्र का यज्ञ भी बंध हो रहा था, बाहुबल देकर उन्होंने उसे संपन्न कराया, अहल्या का पति वरत्य पुनः प्राप्त कराया, और गौतम महर्षि को उनकी खोई हुई पत्नी लौटा दी। सुग्रीव का गया हुआ राज्य फिर प्राप्त कराया। देवताओं की संपत्ति, जो रावण ने छिन ली थी, फिर से लौटा दी। इसलिए यहाँ 'गई बहूर' शब्द का प्रयोग किया गया है। गरीब निवाज, भगवान ने जंगली देवताओं की संपत्ति और राज्य फिर प्राप्त कराया, मीन रूप में शंखासुर से वेद लाकर ब्रह्मा को लौटा लिया, कच्छप रूप से समुद्र मथाकर लक्ष्मी को प्रकट किया, जो दुर्वासा के शाप से समुद्र में लुप्त हो गई थीं। वराह रूप से हिरण्याक्ष से पृथ्वी को लौटा लिया। 'गई बहूर' से ये तीनों सूचित हैं। गरीब निवाज, इस से नरसिंह अवतार के गुण स्पष्ट होते हैं, जिन्होंने दीन प्रहलाद की रक्षा की थी। सरल से वामन अवतार के गुण बताएं, जिन्होंने प्रभु दा छोड़कर भीख मांगी, और सबल से परशुराम के गुण सूचित किए, क्योंकि उन्होंने बल से पर्व ग्रह और आशीर्वादों की रक्षा की, और पुनः रखवंशीयों की गधी पर राज्य शासन किया।
क्या कारण है कि भगवान श्रीराम कभी क्रोध नहीं करते?
भगवान श्रीराम की ममता और करुणा उनके पूर्ण सामर्थ्य का परिणाम है। क्योंकि भगवान को किसी बात का डर या कमी नहीं होती, इसलिए वे अपने भक्तों की गलतियों को माफ कर देते हैं और उनसे क्रोधित नहीं होते।
क्या भगवान के क्रोध न करने के पीछे कोई गहरी वजह हो सकती है?
भगवान की पूरी समर्थता उन्हें भक्तों के अपराधों को न केवल सहन करने, बल्कि उन्हें सुधारने की ताकत देती है। इस कारण से वे हमेशा अपने भक्तों के कल्याण के बारे में सोचते हैं और उन्हें माफ करते हैं।
क्या भगवान के क्रोध न करने से भक्तों का स्वभाव बदल सकता है?
भगवान की करुणा और ममता की भावना यह प्रेरणा देती है कि एक व्यक्ति को भी क्रोध से बचने का प्रयास करना चाहिए। भगवान के गुणों को अपनाने से ही जीवन में शांति और संतुलन आता है।
भगवान श्रीराम ने दशरथ के कुल को कैसे पुनः जीवित किया?
भगवान श्रीराम ने दशरथ के कुल में जन्म लिया, और उनके आने से वह कुल पुनर्जीवित हुआ। भगवान ने इस कार्य के द्वारा यह दिखाया कि वे किसी भी संकट में अपने भक्तों का उद्धार करने के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं।
क्या भगवान श्रीराम के अवतार से दशरथ का कुल सचमुच बचा?
हां, श्रीराम के जन्म से दशरथ का कुल पुण्य और आशीर्वाद से जीवित हुआ। यह उनके भगवान के रूप में शक्ति और सच्चे भक्तों के प्रति उनकी अडिग श्रद्धा का प्रतीक है।
क्या भगवान श्रीराम का अवतार सिर्फ दशरथ के कुल के लिए था?
नहीं, श्रीराम का अवतार समग्र संसार के कल्याण के लिए था। वह सभी के लिए एक आदर्श बने, और उनकी करुणा और ममता ने पूरे ब्रह्मांड में शांति और संतुलन स्थापित किया।
भगवान श्रीराम ने सुग्रीव का खोया हुआ राज्य कैसे दिलवाया?
भगवान श्रीराम ने सुग्रीव के साथ मिलकर रावण से छीन ली गई संपत्ति और राज्य उसे वापस दिलवाया। इस कार्य ने भगवान की नीति, शक्ति, और अपने दोस्तों के प्रति समर्पण को दिखाया।
क्या भगवान ने हमेशा दूसरों के लिए अच्छा किया है?
जी हां, भगवान ने हमेशा दूसरों की मदद की है, चाहे वह सुग्रीव के खोए हुए राज्य को पुनः प्राप्त करना हो या अन्य संकटों में लोगों की मदद करना। उनकी शक्ति और ममता की वजह से ही वे हमेशा दूसरों के कल्याण के लिए कार्य करते हैं।
क्या भगवान की मदद हमेशा प्रत्यक्ष होती है?
भगवान की मदद कभी-कभी अप्रत्यक्ष होती है, जैसे वे दिव्य रूप से अपने भक्तों की रक्षा करते हैं और उन्हें जीवन में सही मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं।
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