
काशीराज के सुपुत्री राजकुमारी शशिकला को मुनिकुमार ने बताया कि आपका और सुदर्शन का संयोग बहुत श्रेष्ठ होगा। उस मुनिकुमार के बातों को सुनने के बाद राजकुमारी को सुदर्शन के ऊपर प्रेम और भी ज्यादा हो गया और भी अधिक हो गया। शशिकला ने अपने समीप रहने वाली सखी को बताया कि मेरा मन उस सुदर्शन के बिना और कहीं नहीं लग रहा है। फिर शशिकला ने अपने सखी को देवी ने स्वप्न में आकर जो बात बताया, वो भी कहा। जब देवी ने मुझे स्वप्न में सुदर्शन का रूप दिखाया था, तब वो गले में एक चमकते हुए माला को पहने हुए थे। मानो मुझे वो साक्षात गले में सांप को पहने हुए परमेश्वर ही लग रहे थे। इस महल की कोई भी वस्तु मुझे तृप्त नहीं कर पा रही है। गगन में देखते हुए शीतल चंद्रमा भी जलता हुआ दिखाई दे रहा है। मेरा मन कर रहा है कि वे सुदर्शन जिस वन में रहते हैं, वही जाकर मैं उनके साथ रह जाऊं। पर क्या कर सकते हैं? मैं राजवंशी कन्या हूं, अपने पिता के अधीन हूं। यदि मेरे पिता स्वयंवर का आयोजन करेंगे, तो मैं सुदर्शन को ही अपना वर चुनूंगी। क्योंकि मैं उनको ही सबसे रमणीय और समर्थशाली मानती हूं। सुदर्शन के पास राज्य, धन इत्यादि नहीं थे। बहुत सारे राजकुमारों के होते हुए भी राजकुमारी शशिकला ने सुदर्शन को ही श्रेष्ठतम वर माना। इसका कारण है देवी का बीज मंत्र। सब कुछ मिल जाता है इस देवी के बीज मंत्र से। सुदर्शन इसको जपता था, इसके कारण शृंगवेरपुर के राजा निषाद ने सुदर्शन को रथ, शस्त्र, घोड़े, हाथी और सैनिक भेंट में दिए। इसी शृंगवेरपुर के राजा को युद्धाजित सुदर्शन को मारने के लिए अपने साथ में लेके आया था। पर देवी माँ ने उनका भी मन बदल दिया। जो राजा सुदर्शन को मारने आए थे, वे स्वयं सुदर्शन को सुरक्षित रखने में तत्पर हो गए। यही है देवी के बीज मंत्र का प्रभाव। सिर्फ़ राजाओं का नहीं, यह मुनियों का मन भी बदल सकता है। इतनी शक्ति है इस देवी के बीज मंत्र में। एक दिन भरद्वाज मुनि ने मनोरमा को बुलाकर कहा कि आपका बेटा अपने शत्रु के साथ युद्ध करने में समर्थ है। अब सुदर्शन शत्रुजित को युद्ध में हराकर अपने राज्य का राजा जरूर बनेगा। मनोरमा ने कहा। मेरे पुत्र के पास शत्रुजित के जैसे बड़ा सैनिक गण नहीं है। उसके पास बहुत सारे मंत्रियों के गण भी नहीं हैं। पर आपके जैसे महंतों का आशीर्वाद और देवी माँ की कृपा से वो ज़रूर अपने राज्य का राजा बन सकता है। आपका वचन सफल हो जाए। हमें आशीर्वाद कीजिए।
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