
साल में ९६ अवसरों पर श्राद्ध करने का विधान शास्त्रों में बताया है।
जो लोग इतना नहीं कर पाते, वे कम से कम इन दो अवसरों पर वार्षिक श्राद्ध करें -
पुत्रानायुस्तथाऽऽरोग्यमैश्वर्यमतुलं तथा।
प्राप्नोति पञ्चेमान् कृत्वा श्राद्धं कामांश्च पुष्कलान्॥
श्राद्ध करनेवाले को पुत्र, आयु, आरोग्य, ऐश्वर्य और अभिलाषों की प्राप्ति होती है।
वार्षिक श्राद्ध के विधान में परम्परानुसार कई भेद हैं -