भगवद्गीता में 18 अध्याय क्यों हैं?

भगवद्गीता में 18 अध्याय क्यों हैं?

भगवद्गीता में 18 अध्याय हैं।

महाभारत में 18 पर्व हैं।

महापुराण 18 हैं।

18 की संख्या का क्या महत्व है?

भले ही हम इसे व्यापक रूप से आत्मा कहते हैं, लेकिन वेदों में आत्मा के 18 रूपों का वर्णन किया गया है।

परात्पर पुरुष

अव्ययात्मा

अक्षरात्मा

क्षरात्मा

शांतात्मा

महानात्मा

विज्ञानात्मा

प्रज्ञानात्मा

प्राणात्मा

शरीरात्मा

हंसात्मा

वैश्वानर अग्नि

तैजस वायु

कर्मात्मा (यज्ञात्मा)

चिदाभास

चिदात्मा

श्री लक्षण

उर्क् लक्षण

उपरोक्त ग्रंथ आत्मा के 18 रूपों को समझने के लिए हैं। अठारह की संख्या यही इंगित करती है।

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भगवद्गीता

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