धन्वंतरी मंत्र

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय धन्वन्तरये अमृतकलशहस्ताय सर्वामयविनाशनाय त्रैलोक्यनाथाय श्रीमहाविष्णवे स्वाहा।

हिन्दी अनुवाद:
भगवान वासुदेव (जो विष्णु के अवतार हैं) को नमस्कार, जो धन्वंतरी के रूप में अमृत कलश धारण करते हैं, सभी रोगों का नाश करते हैं, तीनों लोकों के स्वामी हैं। हे महाविष्णु, मैं यह आहुति समर्पित करता हूँ।

इस मंत्र को सुनने से उपचार और सुरक्षा मिलती है। धन्वंतरी, जो औषधि के देवता हैं, रोगों को समाप्त कर स्वास्थ्य पुनः स्थापित करते हैं। उनके हाथों में अमृत अमरत्व और दिव्य ऊर्जा का प्रतीक है। इस मंत्र का जाप या सुनना उनके आशीर्वाद को आकर्षित करता है, जो एक स्वस्थ जीवन प्रदान करता है, शारीरिक और मानसिक बीमारियों से मुक्त करता है। यह भगवान विष्णु से भी संबंध मजबूत करता है, जो ब्रह्मांड का पालन करते हैं। यह मंत्र तीनों लोकों में शांति और कल्याण सुनिश्चित करता है, जिससे संपूर्ण संतुलन और सामंजस्य प्राप्त होता है।


क्या इस मंत्र को सुनने के लिए दीक्षा आवश्यक है?

नहीं। दीक्षा केवल तब आवश्यक होती है जब आप मंत्र साधना करना चाहते हैं, सुनने के लिए नहीं।

लाभ प्राप्त करने के लिए बस हमारे द्वारा दिए गए मंत्रों को सुनना पर्याप्त है।

Ramaswamy Sastry and Vighnesh Ghanapaathi

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