देवी भागवत के अन्तर्गत रामायण की कथा

0:00 0:00

देवी भागवत के अन्तर्गत रामायण की कथा

हमने व्यापारी और महात्मा की कथा में सुना था कि राम जी ने भी नवरात्र व्रत का आचरण किया। कब किया और कैसे किया, यह व्यास जी हमें विस्तार से बताते हैं। इसी के साथ संक्षेप रूप में व्यास जी रामायण को भी देवी भागवत के अंदर बताते हैं। अयोध्या में सूर्यवंश के राजा दशरथ राज किया करते थे। उनकी तीन पत्नियाँ थीं। कौशल्या, कैकेयी और सुमित्रा। कौशल्या के पुत्र थे श्री राम जी। कैकेयी के भरत और सुमित्रा के दो पुत्र थे, लक्ष्मण और शत्रुघ्न। एक बार विश्वामित्र मुनि राम और लक्ष्मण को अपने यज्ञ की रक्षा करने के लिए ले गए थे। रास्ते में जाते-जाते राम जी ने ताटका नामक राक्षसी का वध कर दिया। राम जी ने सुबाहु का भी वध किया और मारीच को अपने बाणों से दूर फेंक के यज्ञ की रक्षा की। फिर जनकपुरी में शिव धनु को तोड़ने से राम जी ने जनक नंदिनी सीता जी से स्वयंवर कर लिया। लक्ष्मण ने भी सीता की बहन उर्मिला से विवाह कर लिया। भरत और शत्रुघ्न ने भी राजा कुशध्वज की पुत्रियां मांडवी और श्रुतकीर्ति से विवाह कर लिया। महाराज दशरथ ने अपने पहले पुत्र श्रीराम जी को राजा बनाने का सोचा। तब कैकेयी ने उनसे दो वचन मांगे। पहला था कि उनके पुत्र भरत को राजा बनाया जाए और दूसरा था कि राम जी को 14 वर्षों के लिए वनवास भेजा जाए। राम जी भी पिता के आज्ञा के अनुसार लक्ष्मण और सीता के साथ दंडकारण्य में वनवास करने चले गए। दशरथ ने भी इस शोक के कारण देह त्याग कर दिया। भरत ने भी राम जी से अन्याय ना करने की इच्छा से राज्य को स्वीकार नहीं किया। एक दिन रावण की सहोदरी शूर्पणखा ने राम जी से विवाह करने की इच्छा रखी। लक्ष्मण ने उसका नाक काटकर उसको कुरूप बना दिया। रावण ने राम जी को मारने के लिए खर, दूषण आदि राक्षसों को भेजा। राम जी ने उन सबका संहार कर दिया। फिर रावण ने माया से मारीच को हिरण जैसे वेश धारण करा के राम जी के पास भेजा। सीता को उस हिरण ने आकर्षित कर लिया। सीता की इच्छा से राम जी भी उसे पकड़ने के लिए उसका पीछा करते चले गए। राम जी ने अपने बाण से मारा तो मारिच राम जी के आवाज में चिल्लाया। लक्ष्मण, मैं मारा गया हूं, मुझे बचाओ। इसको सुनकर सीता ने लक्ष्मण को जाकर उन्हें बचाने के लिए कहा। लक्ष्मण ने कहा कि राम जी ने मुझे कहा है कि मैं आपकी रक्षा करूं और उनके आने तक आपको छोड़कर कहीं ना जाऊं। इस भूमि में श्री राम को मारने की क्षमता किसी में भी नहीं है। आप निश्चिंत रहिए। सीता ने कहा, मैं अपने पति राम के बिना जी नहीं पाऊंगी। उनको कुछ नहीं होना चाहिए। तुम जाओ। और उनको वापस लेकर आओ। अगर उनको कुछ हुआ तो मैं भी अपना प्राण त्याग दूंगी। लक्ष्मण भी सीता के इन दुखपूर्वक वचनों को सुनकर राम जी को ढूंढते हुए वन के तरफ चले गए। उस समय रावण एक साधु के वेश में सीता के पास आया। सीता ने उसे कोई सन्यासी समझकर आदर और भिक्षा प्रदान किया। सीता ने उसे अपना सारा वृत्तांत भी एक दिव्य साधु समझकर सुनाया। फिर रावण ने सीता का अपहरण करने के लिए उनका हाथ पकड़ लिया और बताया कि मैं रावण हूं। तुम्हारे पति ने मेरे लोगों को मारा है। मेरी बहन शूर्पणखा का भी अपमान किया है। इस कारण मैं आज तुम्हारा अपहरण कर रहा हूं। श्री जगदंबा ये नमः।

 

  • व्यास जी ने देवी भागवत के भीतर राम कथा का वर्णन किस विशेष संदर्भ में किया है?
    व्यास जी ने देवी भागवत में राम कथा का वर्णन इस संदर्भ में किया है कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम ने भी अपने जीवन के संकट काल में शक्ति की उपासना हेतु नवरात्र व्रत का आचरण किया था। यह इस सिद्धांत को पुष्ट करता है कि स्वयं साक्षात भगवान भी जब मनुष्य रूप में अवतार लेते हैं, तो उन्हें भी जगत का कल्याण करने और आसुरी शक्तियों के विनाश हेतु पराशक्ति की आराधना की आवश्यकता होती है।
  • विश्वामित्र मुनि के साथ जाते समय श्री राम द्वारा ताटका वध का क्या प्रतीकात्मक महत्व है?
    विश्वामित्र मुनि द्वारा राम और लक्ष्मण को यज्ञ रक्षा हेतु ले जाना केवल एक असुर का वध नहीं था, बल्कि यह अधर्म पर धर्म की विजय का प्रथम चरण था। ताटका वध के माध्यम से श्री राम ने यह सिद्ध किया कि समाज और ऋषियों के धार्मिक अनुष्ठानों में बाधा डालने वाली शक्तियों का विनाश करना ही एक क्षत्रिय का परम धर्म है।
  • शिव धनुष का खंडन और सीता जी के साथ विवाह किस महान घटना का सूचक है?
    जनकपुरी में शिव धनुष का खंडन करना श्री राम की अतुलनीय शक्ति और शिव-शक्ति के बीच के अटूट संबंध को दर्शाता है। यह स्वयंवर केवल दो व्यक्तियों का मिलन नहीं था, बल्कि धर्म और शक्ति (सीता जी) का एकीकरण था, जो भविष्य में रावण जैसे अधर्मी का विनाश करने के लिए अनिवार्य था।
  • कैकेयी द्वारा माँगे गए दो वचनों के पीछे कौन सा नैतिक द्वंद्व छिपा है?
    कैकेयी ने भरत के लिए राज्य और राम के लिए १४ वर्ष का वनवास माँगकर महाराज दशरथ को एक भीषण धर्म-संकट में डाल दिया था। यहाँ यह गुप्त पक्ष उजागर होता है कि वचन की सत्यता और पितृ-आज्ञा के पालन हेतु श्री राम ने राजसुख का सहर्ष त्याग कर दिया। यह दर्शाता है कि व्यक्तिगत अधिकार से ऊपर सत्य और वचन का पालन होता है।
  • भरत ने राज्य स्वीकार न करके किस आदर्श की स्थापना की?
    भरत ने दशरथ की आज्ञा और कैकेयी के वचनों के बाद भी राज्य को स्वीकार नहीं किया। उन्होंने यह सिद्ध किया कि जिस राज्य पर बड़े भाई का अधिकार हो, उसे छल या वरदान से प्राप्त करना अधर्म है। भरत का यह त्याग निःस्वार्थ प्रेम और भ्रातृ-धर्म का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है।
  • शूर्पणखा के अपमान और रावण के प्रतिशोध के पीछे क्या कारण था?
    शूर्पणखा ने राम जी से विवाह की अनुचित इच्छा रखी और लक्ष्मण ने उसका नाक काटकर उसे दंडित किया। यह घटना रामायण के युद्ध का बीज बनी। रावण का प्रतिशोध उसकी अपनी बहन के अपमान के कारण था, किंतु उसका आधार काम और अहंकार था, जिसके कारण उसने सीता जी के अपहरण जैसा निकृष्ट कार्य किया।
  • मारीच ने हिरण का वेश क्यों धारण किया और इसके पीछे रावण की क्या योजना थी?
    रावण जानता था कि श्री राम और लक्ष्मण के रहते वह सीता का अपहरण नहीं कर सकता। इसलिए उसने मारीच को स्वर्ण मृग बनाकर भेजा ताकि वह सीता को आकर्षित कर सके और राम-लक्ष्मण को कुटिया से दूर ले जा सके। यह माया और छल का प्रतीक है, जो मनुष्य को सत्य मार्ग से विचलित करने का प्रयास करता है।
  • लक्ष्मण ने प्रारंभ में कुटिया छोड़ने से क्यों मना किया और सीता जी के किन वचनों ने उन्हें विवश कर दिया?
    लक्ष्मण को श्री राम ने सीता की रक्षा का भार सौंपा था और वे जानते थे कि राम जी अजेय हैं। किंतु जब मारीच ने राम जी की आवाज में सहायता पुकारी, तब सीता जी अत्यंत व्याकुल हो गईं। उन्होंने लक्ष्मण को कठोर और दुखपूर्वक वचन कहे कि उन्हें अपने भाई की रक्षा हेतु जाना ही होगा। सीता जी की विह्वलता और प्राण त्यागने की चेतावनी ने लक्ष्मण को जाने पर विवश किया।
  • रावण ने सीता जी के अपहरण के लिए साधु वेश का ही चुनाव क्यों किया?
    साधु वेश पवित्रता और विश्वास का प्रतीक है। रावण जानता था कि एक सन्यासी के रूप में ही वह सीता जी के निकट जा सकता है और उनका विश्वास प्राप्त कर सकता है। यह दर्शाता है कि अधर्म प्रायः धर्म का चोला पहनकर ही मनुष्य को धोखा देने का प्रयास करता है, जिससे सावधान रहना आवश्यक है।
हिन्दी

हिन्दी

देवी भागवत

Click on any topic to open

0

Copyright © 2026 | Vedadhara | All Rights Reserved. | Designed & Developed by Claps and Whistles
| | | | |
Vedahdara - Personalize

We use cookies