सुरक्षा के लिए गोवर्धनधारी कृष्ण मंत्र

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सुरक्षा के लिए गोवर्धनधारी कृष्ण मंत्र

ॐ नमो गोवर्धनोद्धरणाय गोविन्दाय गोकुलनिवासाय गोपालाय गोपालपतये गोपीजनभर्त्रे गिरिजोद्धर्त्रेजगद्विधये जगन्मङ्गलाय जगन्निवासाय जगन्मोहनाय कोटिमन्मथमन्मथाय वृषभानुसुतावराय श्रीनन्दराजकुलप्रदीपाय करुणानिधये  श्रीकृष्णाय परिपूर्णतमाय त्वसङ्ख्यब्रह्माण्डपतये गोलोकधामधिषणाधिपतये स्वयं भगवते सबलाय नमस्ते नमस्ते नमस्ते ।

हे गोवर्धन पर्वत को उठाने वाले भगवान श्रीकृष्ण! आपको नमस्कार।

हे गोविन्द! हे गोकुल में निवास करने वाले! हे गोपाल (गायों की रक्षा करने वाले)! आपको नमस्कार।

हे गोपों और गोपियों के स्वामी एवं पालनकर्ता! आपको नमस्कार।

हे गिरिराज गोवर्धन को धारण करने वाले! हे जगत् की व्यवस्था करने वाले! आपको नमस्कार।

हे सम्पूर्ण संसार का मंगल करने वाले! हे सम्पूर्ण जगत् के आश्रय! आपको नमस्कार।

हे सम्पूर्ण जगत् को मोहित करने वाले! जिनका सौन्दर्य करोड़ों कामदेवों को भी मोहित कर दे, ऐसे प्रभु को नमस्कार।

हे वृषभानु की पुत्री श्रीराधा के प्रियतम! आपको नमस्कार।

हे नन्दराज के कुल के दीपक! आपको नमस्कार।

हे असीम करुणा के भण्डार! आपको नमस्कार।

हे श्रीकृष्ण! जो सभी अवतारों में परिपूर्णतम भगवान हैं, आपको नमस्कार।

हे असंख्य ब्रह्माण्डों के स्वामी! आपको नमस्कार।

हे गोलोकधाम के अधिपति! आपको नमस्कार।

हे स्वयं भगवान! हे बलरामजी सहित विराजमान प्रभु! आपको बार-बार नमस्कार।


क्या इस मंत्र को सुनने के लिए दीक्षा आवश्यक है?

नहीं। दीक्षा केवल तब आवश्यक होती है जब आप मंत्र साधना करना चाहते हैं, सुनने के लिए नहीं।

लाभ प्राप्त करने के लिए बस हमारे द्वारा दिए गए मंत्रों को सुनना पर्याप्त है।

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