
एक शांत गाँव में कवि नाम का एक बालक रहता था। वह बहुत अधिक नहीं बोलता था, लेकिन वह चीज़ों को बहुत ध्यान से देखता था।
वह देखता कि—
घर के बड़े कितनी धीरे और प्रेम से बोलते हैं।
गुरुजी कितनी सहजता से पाठ समझाते हैं।
किसान कितनी शांति से अपना काम करते हैं।
और यात्री कितनी अनोखी कहानियाँ सुनाते हैं।
एक दोपहर, पाठशाला के बाद कवि एक पेड़ के नीचे बैठा था। उसका मन विचारों से भरा था। उसने स्वयं से कहा, 'हर कोई कुछ न कुछ सिखाता है, पर सबके सिखाने का ढंग अलग है। कोई बहुत जानता है, तो कोई कम। मैं यह कैसे चुनूँ कि क्या सीखना है और क्या छोड़ देना है?'
यह एक सच्चा प्रश्न था। यह किसी पुस्तक का नहीं, बल्कि जीवन का प्रश्न था।
तभी कवि ने एक छोटी मधुमक्खी को उड़ते देखा। वह मधुमक्खी एक लाल गुलाब पर गई। फिर एक सफेद चमेली के फूल पर। फिर पत्थर के पास उगे एक जंगली फूल पर।
कवि ने ध्यान से देखा। मधुमक्खी किसी भी फूल पर बहुत देर तक नहीं रुकी। उसने यह नहीं सोचा कि 'यह फूल छोटा है, तो मैं इसे छोड़ दूँ।' न ही उसने यह सोचा कि 'यह फूल बहुत बड़ा है, तो मैं इसका सब कुछ ले लूँ।'
उसने केवल मीठा रस लिया और आगे बढ़ा। कवि उसे देखता रहा और सोचा, 'मधुमक्खी ऐसा क्यों करती है?'
उस रात कवि ने यही प्रश्न अलग-अलग लोगों से पूछा। उसने अपने गुरुजी से पूछा, 'दूसरों से मुझे कैसे सीखना चाहिए?' गुरुजी बोले, 'मन लगाकर सीखो। पाठ को ध्यान से पढ़ो और उसे अच्छे से याद रखो।'
कवि ने सोचा, 'यह तो ठीक है, पर क्या इतना ही काफी है?'
फिर उसने अपनी दादी से पूछा, 'लोगों से सीखने का सबसे अच्छा ढंग क्या है?' वे मुस्कुराईं और बोलीं, 'सबकी बातें ध्यान से सुनो। छोटी कहानियों में भी अच्छी बातें छिपी होती हैं।'
कवि ने सिर हिलाया। 'यह भी सच है।'
अगले दिन उसने खेत में काम कर रहे एक किसान से पूछा, 'आप दूसरों से कैसे सीखते हैं?' किसान ने अपना पसीना पोंछा और कहा, 'बातों को नहीं, काम को देखो। मिट्टी बातों से अधिक सिखाती है।'
अंत में उसने अपने मित्र से पूछा, 'तुम लोगों से कैसे सीखते हो?' सखा ने कहा, 'जो सबसे आगे है, बस उसकी नकल करो।' कवि सोच में पड़ गया। 'क्या नकल करना ही सीखना है?'
मधुमक्खी की सीख
उस रात कवि को फिर से वह मधुमक्खी याद आई। वह केवल वही लेती थी जिसकी उसे सच में आवश्यकता थी।
कवि को अपने प्रश्न का उत्तर मिल गया। उसे समझ आया कि सीखने का कोई एक तरीका नहीं होता। एक समझदार बालक:
गुरु से सच्चाई सीखता है,
बड़ों से ज्ञान लेता है,
काम करने वालों से अनुभव लेता है,
और अपनी गलतियों से भी पाठ सीखता है।
वह बिना सोचे-समझे सबकी नकल नहीं करता। जैसे मधुमक्खी हर फूल से केवल मीठा रस लेती है, वैसे ही एक बुद्धिमान बालक हर जगह से केवल अच्छी बातें चुनता है।
वर्षों बाद जब लोगों ने कवि से पूछा, 'आप इतने ज्ञानी कैसे बने?' तो उसने पुस्तकों की बात नहीं की। वह मुस्कुराया और बोला, 'एक छोटी मधुमक्खी ने मुझे सिखाया था कि सीखा कैसे जाता है।'
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