सौ साल सुखी और स्वस्थ रहने का मंत्र

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सौ साल सुखी और स्वस्थ रहने का मंत्र

पश्येम शरदः शतम् ॥१॥

जीवेम शरदः शतम् ॥२॥

बुध्येम शरदः शतम् ॥३॥

रोहेम शरदः शतम् ॥४॥

पूषेम शरदः शतम् ॥५॥

भवेम शरदः शतम् ॥६॥

भूयेम शरदः शतम् ॥७॥

भूयसीः शरदः शतात्॥८॥

हम सौ वर्षों तक इस संसार को देखते रहें, जीवन के सौ सुंदर शरद ऋतु का अनुभव करें।

हम सौ वर्षों तक स्वस्थ और पूर्ण जीवन जीएं।

हम सौ वर्षों तक बुद्धिमान और जागरूक बने रहें, हमारी समझ और विवेक बना रहे।

हम सौ वर्षों तक निरंतर वृद्धि करते रहें — शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से।

हम सौ वर्षों तक पोषित और समृद्ध रहें, जीवन में किसी चीज़ की कमी न हो।

हम सौ वर्षों तक अस्तित्व में बने रहें, स्थिर और सशक्त जीवन जिएं।

हम सौ वर्षों तक सम्मान और गरिमा के साथ जीवन बिताएं, समाज में आदर पाएँ।

और यदि संभव हो, तो सौ वर्षों से भी अधिक समय तक ऐसा ही जीवन प्राप्त करें।

सार
यह मंत्र केवल लंबी उम्र की प्रार्थना नहीं है।
यह कहता है —
लंबा जीवन हो, लेकिन वह जीवन जागरूकता, स्वास्थ्य, विकास, सम्मान और संतुलन से भरा हुआ हो।

 


क्या इस मंत्र को सुनने के लिए दीक्षा आवश्यक है?

नहीं। दीक्षा केवल तब आवश्यक होती है जब आप मंत्र साधना करना चाहते हैं, सुनने के लिए नहीं।

लाभ प्राप्त करने के लिए बस हमारे द्वारा दिए गए मंत्रों को सुनना पर्याप्त है।

Ramaswamy Sastry and Vighnesh Ghanapaathi

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