काशी दर्शन

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आगम और तंत्र: व्यावहारिक दर्शन

आगम और तंत्र व्यावहारिक दर्शन पर ध्यान केंद्रित करते हैं। इसका मतलब है कि वे रोज़मर्रा की ज़िंदगी और आध्यात्मिक प्रथाओं का मार्गदर्शन करते हैं। आगम वे ग्रंथ हैं जो मंदिर के अनुष्ठान, निर्माण, और पूजा को कवर करते हैं। वे सिखाते हैं कि मंदिर कैसे बनाएं और अनुष्ठान कैसे करें। वे यह भी बताते हैं कि देवताओं की पूजा कैसे करें और पवित्र स्थानों को कैसे बनाए रखें। तंत्र आंतरिक प्रथाओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं। इनमें ध्यान, योग, और मंत्र शामिल हैं। तंत्र व्यक्तिगत आध्यात्मिक विकास का मार्गदर्शन करते हैं। वे सिखाते हैं कि दिव्य ऊर्जा से कैसे जुड़ें। आगम और तंत्र दोनों ज्ञान के अनुप्रयोग के बारे में हैं। वे लोगों को आध्यात्मिक रूप से पूर्ण जीवन जीने में मदद करते हैं। ये ग्रंथ केवल सैद्धांतिक नहीं हैं। वे चरण-दर-चरण निर्देश प्रदान करते हैं। आगम और तंत्र का पालन करके, हम आध्यात्मिक प्रगति प्राप्त कर सकते हैं। वे जटिल विचारों को सरल और क्रियान्वित करने योग्य बनाते हैं। यह व्यावहारिक दृष्टिकोण उन्हें दैनिक जीवन में मूल्यवान बनाता है। आगम और तंत्र आध्यात्मिकता को समझने और अभ्यास करने की कुंजी हैं।

अनाहत चक्र जागरण के फायदे और लक्षण क्या हैं?

शिव संहिता के अनुसार अनाहत चक्र को जागृत करने से साधक को अपूर्व ज्ञान उत्पन्न होता है, अप्सराएं तक उस पर मोहित हो जाती हैं, त्रिकालदर्शी बन जाता है, बहुत दूर का शब्द भी सुनाई देता है, बहुत दूर की सूक्ष्म वस्तु भी दिखाई देती है, आकाश से जाने की क्षमता मिलती है, योगिनी और देवता दिखाई देते हैं, खेचरी और भूचरी मुद्राएं सिद्ध हो जाती हैं। उसे अमरत्व प्राप्त होता है। ये हैं अनाहत चक्र जागरण के लाभ और लक्षण।

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लॊमहर्षण नामक पहले सूत को किसने मारा था ?

प्रत्येक अष्टमी और मङ्गलवार के दिन इनका दर्शन किया जाता है। देवी जी के पश्चिम बगल में हनुमान जी के मन्दिर से सटा हुआ उत्तर बगल का मंदिर भैरव मन्दिर है, जो पूर्वाभिमुख है ।
उन्मत्त भैरव तीर्थं के
उत्तर बगल में विशाल कुण्ड ( तालाब ) है ।
उन्मत्त भैरव का काशीखण्ड, काशी रहस्य और लिङ्ग पुराण में विस्तार से वर्णन है ।
३८. उन्मत्त भैरवाय नमः [ मो० देऊरा गाँव में ]
उन्मत्त भैरव के दर्शन-पूजन करने वाले भक्तों के दुःख-कष्ट और चिन्ता दूर होती है; भक्त सभी कार्यों में सफलीभूत होता है। इनके दर्शन से भूत, प्रेत, शत्रु आदि कष्ट नहीं देते। इनके मन्दिर का जीर्णोद्धार कराने के पश्चात् भक्त जो भी कामना या प्रार्थना करता है प्राप्त करता है। इसके | साथ ही उसके असाध्य रोग शान्त तोते हैं। जेल में बन्द कैदी छूट जाते हैं. और पुत्र की प्राप्ति होती है। प्रत्येक अष्टमी और मङ्गलवार के दिन इनका. दर्शन किया जाता है।
उन्मत्त भैरव के पश्चिम बंगल में सड़क के दाहिनी तरफ शंकर जी के मन्दिर में नीलकण्ठगण की मूर्ति है, जो पूर्वाभिमुख है।
नीलकण्ठगण का प्रमाण काशी रहस्य, काशी-दर्शन-यात्रा आदि में विस्तार से प्राप्त होता है ।
३९. नीलकण्ठगणाय नमः [ मो० देऊरा गांव में ]
नीलकण्ठगण के दर्शन-पूजन से धन-धान्य की प्राप्ति होती है तथा गाँव वालों की रक्षा होती है।
नीलकण्ठगण के पश्चिम बगल में सड़क के दाहिनी तरफ शकर जी को मन्दिर में जो मूर्ति पूर्वाभिमुख है वही नीलम ष्टगण है ।
नीलकण्ठगण का काशी रहस्य और काशी-दर्शन यात्रा में विस्तार से वर्णन है ।
'४०. कालकूटगणाय नमः [ मो० देऊरा गाँव में ]
कालकूटगण के दर्शन-पूजन से काल का भय नहीं होता। इनके दर्शन - करने वाला व्यक्ति अल्प समय में ही मनोरथ को पूर्ण करता है। इनके · दर्शन-पूजन से पुरवासियों की रक्षा होती है ।
कालकूटगण के पश्चिम वगल में सड़क से दाहिनी तरफ देवी के मन्दिर 'मैं विमला देवी की प्रतिमा है, जो पूर्वाभिमुख है ।
विमला देवी जी का काशी रहस्य, काशी भंभव, काशी- वार्षिक यात्र • आदि में विस्तृत वर्णन है ।
-४०. विमला दुर्गा देव्यै नमः [मो० देऊरा गांव में ]
विमला देवी के दर्शन-पूजन करने वाले भक्तों को देवी धन-धाम •और सुख के साधन देकर सुखी बनाती हैं और पुरवासियों की कल्या करती हैं ।
अतः भक्तों को प्रत्येक अष्टमी के दिन दर्शन-पूजन करना चाहिए। विमला देवो के पश्चिम बगल में सड़क के दाहिनी तरफ शंकर जी
मन्दिर में महादेवेश्वर का लिंग है। काशी खण्ड, शिव पुराण एवं
होता है।
महादेवेश्वर का प्रमाण काशी रहस् लिंगपुराण में विस्तार से प्राप
४१. महादेवेश्वराय नमः [मो० देऊरा गाँव में]
महादेव के दर्शन-पूजन से शिव-शक्ति-गणेश और विष्णु की भक्ति प्राप् होती है और साथ ही घन, विद्या, सुख तथा शान्ति की वृद्धि होती है।
महादेव के पश्चिम बगल में सड़क के दाहिनी तरफ शंकरजी के मन्दि 'मैं नन्दीकेश्वर का लिंग है जिनका प्रमाण-नन्दी उप पुराण. काशी रह और काशीखण्ड में विस्तृत रूप में प्राप्त होता है।
४२. नन्दीकेश्वराय नमः [ मो० देऊरा गाँव मे ]
होता है । इनके दर्शन से शत्रु परास्त होते हैं और शंकर-भवानी की भक्ति प्राप्त होती है।
नन्दीकेश्वर के पश्चिम बगल में सड़क के दाहिनी तरफ शंकर जी के मन्दिर में भृगीरीगण की प्रतिमा है जो पूर्वाभिमुख है ।
काशी रहस्य और शिव पुराण में भृंगीरीटगण का विस्तार से वर्णन है ।
४३. भृंगीरीटगणाय नमः [ मो० देऊरा गाँव में ]
भृगोरीटगण के दर्शन-पूजन से सम्पूर्ण कार्य सफल होते हैं । ये गाँव वालों की रक्षा भी करते हैं।
भृंगीरीटगण के पश्चिम बगल में सड़क के दाहिनी तरफ गौरा गाँव में शङ्कर जी के मन्दिर में गणप्रियेश्वर का लिंग है। काशी रहस्य और शिव पुराण में इनका विस्तार से वर्णन है ।
४४. गणप्रियेश्वराय नमः [मो० गौरा गाँव में]
गणप्रिय अपने दर्शन-पूजन करने वाले भक्तों को दुःख और दरिद्रता को दूर करते हैं और पुरवासियों की रक्षा करते हैं ।
गणप्रियेश्वर से पश्चिम बगल में शङ्कर जी के मन्दिर में विरुपाक्ष गण हैं,. जो पूर्वाभिमुख हैं । विरुपाक्षगण का प्रमाण काशी रहस्य और शिव पुराण में है ।
४५ विरुपाक्षगणाय नमः [ मो० गौरागांव में ] विरुपाक्षगण के दर्शन- पूजन करने वाला भक्त सब कार्य में सफल होता है और ये गाँव वालों की रक्षा करते हैं। विरुपाक्षगण से पश्चिम बगल में चकमातलदेई गाँव में सड़क के दाहिनी तरफ शंकरजी के मन्दिर में यक्षेश्वर हैं ।
४६ यक्षेश्वराय नमः [ चक्रमातलदेई गाँव में ] यक्षेश्वर के दर्शन- पूजन से मनुष्य बुद्धिमान और चतुर होता है तथा पुरवासियों को सुख प्राप्त होता है । यक्षेश्वर के पश्चिम प्रयागपुर गाँव में सड़क की दाहिनी तरफ शंकर जी के मन्दिर में विमलेश्वर की प्रतिमा है। विमलेश्वर का

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