जय संकट मोचन जय हो

गीत -

तुमसे बाँधा बंधन,
तुमपे सब अर्पण,
जय संकट मोचन जय हो!

सबका रखवाला तू,
हे दुख के भंजन,
जय संकट मोचन जय हो!

भक्ति और महिमा
है जहाँ राम का नाम, तू भी वहाँ,
है मगन उसकी भक्ति में तू।
जाने किस रूप में हमको मिल जाएगा,
है चिरंजीवी धरती पे तू,
हर कण में समाया है तू।

तेरे चरण हैं चारों धाम,
बोलो जय हनुमान!
बन जाएँगे सब बिगड़े काम,
बोलो जय हनुमान!

समर्पण और ज्ञान
तुमसे सीखा है ना, भक्त होता है क्या,
मोह बिन खुद को अर्पित करे।
अपने संसार का कैसे उद्धार हो,
तुमसे हम गुण ये अर्जित करें।

वेद पुराणों के तुम ज्ञाता,
नवनिधि अष्टसिद्धि दाता मेरे।

शक्ति और अवतार
मन से कोमल है और तन से बलवान जो,
अंजनी का दुलारा है तू।
सारी लंका जला दी सिया के लिए,
राम को सबसे प्यारा है तू।

है शिव का ही अवतार तू!

तेरे चरण हैं चारों धाम,
बोलो जय जय हनुमान!
बन जाएँगे सब बिगड़े काम,
बोलो जय जय हनुमान!

समापन दोहा
पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥

ॐ पवन सुत हनुमान की जय!
ॐ सियावर राम चंद्र की जय!

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