हरिहर- विष्णु और शिव एक ही

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हरिहर- विष्णु और शिव एक ही

 

त्रिवेणी संगम की नदियों में से गंगा जी सर्वश्रेष्ठ हैं। वैसे ही राम भक्ति संतों के समाज में सर्वश्रेष्ठ है। सर्वतीर्थमयी गंगा, गंगा जी सर्वतीर्थमयी हैं। वैसे ही राम भक्ति सर्वव्याप्त है — यह पूरे जगत में व्याप्त है। यह जगत ही राममय है।

गंगा नदी हरी चरण से निकली हुई है, और राम भक्ति हरी चरण में ही प्राप्त होती है। यमुना नदी सूर्य से उत्पन्न हुई है, और नित्यनैमित्तिक कर्म भी सूर्य के उदय होने से ही मनुष्य पुण्यकर्म में प्रवृत्त होता है।

सरस्वती देवी ब्रह्मा जी की पुत्री हैं। सबसे पहले अठारह सोपानों द्वारा मनुष्य को जगत-ब्रह्मवत्ता का बोध हुआ। वही ब्रह्मविद्या यह बताती है कि राम जी ही परब्रह्म हैं, परमात्मा हैं।

अब बात करें हरी और हर की — हरी यानी विष्णु भगवान, हर यानी भगवान भोलेनाथ शिवजी। विष्णु जी और शिवजी, दोनों एक ही हैं। इस तत्व को दर्शाने वाली एक मूर्ति भी है।

एक बार देवों ने भगवान विष्णु से पूछा — 'हे वासुदेव, जगत के नाथ, कृपया हमें बताइए कि भगवान शंभु, शिवजी, कहाँ रहते हैं?'

भगवान विष्णु बोले — 'भगवान शिवजी यहीं पर हैं, मेरे शरीर में। क्या आप लोग उन्हें मेरे भीतर नहीं देख पा रहे हैं?'

देवताओं ने कहा — 'प्रभु, आप तो स्वयं विष्णु हैं। हम आपमें शिवजी को कैसे देखें? कृपया सत्य बताइए, शिव भगवान कहाँ हैं?'

तब भगवान विष्णु ने अपने हृदय-पंकज में स्थित अति विशिष्ट शिवलिंग की मूर्ति दिखलाई। उसे देखकर देवता उन दोनों की आराधना करने लगे।

इस प्रकार हरी और हर एक ही हैं। यह कथा वामन पुराण से उद्धृत है।

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जय श्रीराम

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