नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने के लिए हनुमान मंत्र

कशिं कुक्ष वरवर अञ्जनावरपुत्र आवेशयावेशय ॐ ह्रीं हनुमन् फट् ।

यह श्री हनुमान को उनके वीर, उग्र और रक्षक स्वरूप में पुकारने का मंत्र है। इसमें भक्त केवल प्रार्थना नहीं करता, बल्कि हनुमान की दिव्य शक्ति को अपने भीतर जागृत करने का आह्वान करता है।

‘अञ्जनावरपुत्र’ कहकर हनुमान को उनके दिव्य जन्म और श्रेष्ठता सहित संबोधित किया जाता है।
‘आवेशय आवेशय’ का अर्थ है — अपनी शक्ति का प्रवेश कराओ, अपने तेज से भर दो।
‘ॐ ह्रीं’ चेतना को शुद्ध और शक्तिशाली बनाता है।
‘फट्’ बाधाओं, भय और नकारात्मक प्रभावों को काटने का संकेत है।

समग्र भाव यह है कि यह मंत्र आंतरिक निर्भयता, मानसिक शुद्धि, और बाहरी-भीतरी विघ्नों से रक्षा के लिए है। यह व्यक्ति के भीतर साहस, स्थिरता और शक्ति का संचार करता है। जब मन डर, संदेह या नकारात्मक विचारों से घिरा हो, तब यह मंत्र एक मानसिक कवच का कार्य करता है।


क्या इस मंत्र को सुनने के लिए दीक्षा आवश्यक है?

नहीं। दीक्षा केवल तब आवश्यक होती है जब आप मंत्र साधना करना चाहते हैं, सुनने के लिए नहीं।

लाभ प्राप्त करने के लिए बस हमारे द्वारा दिए गए मंत्रों को सुनना पर्याप्त है।

Ramaswamy Sastry and Vighnesh Ghanapaathi

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