संत वाणी – २२

संत वाणी – २२

• समस्त दानों में भूखे को अन्न देना अत्यंत श्रेष्ठ माना गया है, परंतु किसी अज्ञानी को सत्य और आध्यात्मिक ज्ञान प्रदान करना उससे भी अधिक महान कृत्य है।

• एकांत में बैठकर पूर्ण दृढ़ता और अनन्य भाव से प्रभु श्री राम के नाम का ध्यान और अनुष्ठान करना ही सर्वोत्तम पारमार्थिक मार्ग है।

• दूसरों की संपत्ति और पराई स्त्री को सर्वथा अस्पृश्य समझना ही मनुष्य के लिए सबसे पवित्र और निर्मल तप है।

• इस कलियुग में भवसागर से पार होने के लिए श्री राम के पवित्र नाम के अतिरिक्त कोई अन्य आश्रय या सहारा नहीं है।

• ईश्वर के स्वरूप को अपने चित्त में इतनी गहराई से स्थापित कर लेना चाहिए कि जाग्रत, स्वप्न और सुषुप्ति—किसी भी अवस्था का भान शेष न रहे।

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संत वाणी

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