संत वाणी - २०

  • ईश्वर के नाम का कीर्तन व्यक्ति को उसके धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ाता है। कीर्तन की शक्ति इतनी महान है कि उसके सामने मुक्ति का लक्ष्य भी छोटा पड़ जाता है।
  • सभी दानों में अन्नदान को श्रेष्ठ माना जाता है, तथापि ज्ञान-दान का महत्त्व उससे भी अधिक है।
  • शांत बैठकर राम-नाम का जाप करें। अपने मन को पूरी तरह से उसमें लगाकर एकाग्र हो जाएँ। इससे बेहतर कोई और साधना नहीं है।
  • हे गोविन्द, मुझे इतनी शक्ति दो कि मैं अपनी प्रशंसा और दूसरों की आलोचना से दूर रहूँ। हे राम, मुझे ऐसी दृष्टि दो कि मैं सभी प्राणियों में तुम्हारा ही स्वरूप देखूँ और तुम्हारे दिए हुए में ही खुश रहूँ।
  • चाहे योग हो, तप हो, कर्म हो या ज्ञान, इन सबका उद्देश्य केवल ईश्वर की प्राप्ति है। ईश्वर के बिना ये सब साधन निरर्थक हैं।
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