प्रशासनिक एवं आधिकारिक शक्ति के लिए मंत्र

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बहुत बड़ा सहारा है मेरे लिए यह 👍 -pratyasha

आपके मंत्र हमेशा काम आते हैं। 😊 -अंजू दोशी

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सुदर्शन चक्र शाबर मंत्र

ॐ विष्णु चक्र चक्रौति भार्गवन्ति, सैहस्त्रबाहु चक्रं चक्रं चक्रौती युद्धं नाष्यटष्य नाष्टष्य चल चक्र, चक्रयामि चक्रयामि. काल चक्रं भारं उन्नतै करियन्ति करियन्ति भास्यामि भास्यामि अड़तालिशियं भुजगेन्द्र हारं सुदर्शन चक्रं चलायामि चलायामि भुजा काष्टं फिरयामि फिरयामि भूर्व : भूवः स्वः जमुष्ठे जमुष्ठे चलयामि रुद्र ब्रह्म अंगुलानि ब्रासमति ब्रासमति करियन्ति यमामी यमामी ।

भक्ति-योग का लक्ष्य क्या है?

भक्ति-योग में लक्ष्य भगवान श्रीकृष्ण के साथ मिलन है, उनमें विलय है। कोई अन्य देवता नहीं, यहां तक कि भगवान के अन्य अवतार भी नहीं क्योंकि केवल कृष्ण ही सभी प्रकार से पूर्ण हैं।

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समुद्र मंथन के लिये रस्सी किसे बनाया गया था ?

अभीवर्तेन मणिना येनेन्द्रो अभिववृधे । तेनास्मान् ब्रह्मणस्पतेऽभि राष्ट्राय वर्धय ॥१॥ अभिवृत्य सपत्नान् अभि या नो अरातयः । अभि पृतन्यन्तं तिष्ठाभि यो नो दुरस्यति ॥२॥ अभि त्वा देवः सविताभि षोमो अवीवृधत्। अभि त्व....

अभीवर्तेन मणिना येनेन्द्रो अभिववृधे ।
तेनास्मान् ब्रह्मणस्पतेऽभि राष्ट्राय वर्धय ॥१॥
अभिवृत्य सपत्नान् अभि या नो अरातयः ।
अभि पृतन्यन्तं तिष्ठाभि यो नो दुरस्यति ॥२॥
अभि त्वा देवः सविताभि षोमो अवीवृधत्।
अभि त्वा विश्वा भूतान्यभीवर्तो यथाससि ॥३॥
अभीवर्तो अभिभवः सपत्नक्षयणो मणिः ।
राष्ट्राय मह्यं बध्यतां सपत्नेभ्यः पराभुवे ॥४॥
उदसौ सूर्यो अगादुदिदं मामकं वचः ।
यथाहं शत्रुहोऽसान्यसपत्नः सपत्नहा ॥५॥
सपत्नक्षयणो वृषाभिरष्ट्रो विषासहिः ।
यथाहमेषां वीराणां विराजानि जनस्य च ॥६॥

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