श्रीविष्णुनामसहस्रम्
यस्य स्मरणमात्रेण जन्मसंसारबन्धनात् ॥
विमुच्यते नमस्तस्मै विष्णवे प्रभविष्णवे (१)
वैशंपायन उवाच ।
श्रुत्वा धर्मानशेषेण पावनानि च सर्वशः ॥
युधिष्ठिरः शांतनवं पुनरेवाभ्यभाषत।
श्रीगणेशाय नमः॥
वैशंपायनजी बोले कि युधिष्ठिर नाम युद्ध में न भागनेवाले ऐसे धर्मराजा ने सब पवित्रकरनेवाले धम्मौं को शंतनु के पुत्र भीष्मपितामह हसे अशेष नाम संपूर्ण सर्वधर्म जैसे - आपद्धर्म, राजधर्म, मोक्षधर्म, दानधर्मादिक, वो धर्म कैसे हैं, कि पावननाम पवित्रकरनेवाले सर्वशः नाम सब तरह से पावन हैं श्रवणमनननिदिध्यासनादिक वा सब प्रकारके धर्म व्रत उपासना उपवास कि प्रायश्चित्तादिकको भीष्मजीसे सुनकर फेर पूँछा ॥१॥
युधिष्ठिर उवाच ॥
किमेकं दैवतं लोके किं वाप्येकं परायणम् ॥
स्तुवन्तः कं कमर्चन्तः प्राप्नु- युर्मानवाः शुभम् ॥ २॥
को धर्मः स- धर्माणां भवतः परमो मतः ॥
किं जपन्मुच्यते जन्तुर्जन्मसंसारबन्ध नात् ॥ ३ ॥
भीष्म उवाच ॥
जगत्प्रभुं देवदेवमनंतं पुरुषोत्तमम् ॥ स्तुवन्नामसहस्रेण पुरुषः सततोत्थितः ॥४॥
युधिष्ठिर ने कहा इस लोकमें एक बड़ा देवता कौन है अथवा एक प्राप्त होनेके लायक कौन है और किसके जप करने से किसकी पूजा और किसकी स्तुति कर- नेसे मनुष्यका कल्याण होता है ॥ २ ॥
सब धर्मों में कौन धर्म आपके परममतसे बड़ा है और किस नाम के जप करने से प्राणी जन्ममरणरूपी संसार के बंधनसे छूट जाता है (परममत नाम उत्तम मत जप तीन तर हका है १ ऊंचे शब्दसे २. मध्यमस्वर से ३ मनसे, जो जन्म लेता रहे उसका नाम जंतु है)
युधिष्टिरने यही पांच प्रश्न किये १ कौन एक बड़ा देवता है२ कौन प्राप्त होने लायक है किसकी पूजा और स्तुति करने से आदमीका भला होता है ४ सब धर्मो में आपके परममत से कौन धर्म बड़ा है ५ किस नामके जपसे फेर जन्म नहीं होता?
भीष्मने उत्तर दिया (जिससे सब शत्रु डरै सो भीष्म) आदमी सदा उठकर जगत् के प्रभु नाम स्वामी और देवतों के देवता अनंत पुरुषोत्तमके सहस्रनामसे स्तुति करने से संसार से छूट जाता है सब स्थावर जंगम- का नाम जगत् है, उसके प्रभु अनंत जिसका अंत नहीं और किसी देश किसी काल किसी वस्तुमें जिसको नियत न करसकै पुरुषोत्तम नाश होनेवाले और चिर जीवी रहनेवालोंसे परे ॥ ४॥
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