विभिन्न स्वरूपों में त्र्यम्बकं यजामहे

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दिल को शांति देने वाला यह मंत्र 💖 -शांताराम भानोसे

हे भगवान मेरी सारी बाधाएं दूर करो 🙏🙏🙏🙏🙏 -rakesh mirashi

यह वेबसाइट ज्ञान का खजाना है। 🙏🙏🙏🙏🙏 -कीर्ति गुप्ता

इन मंत्रों से मेरा जीवन बदल गया है। 🙏 -मधुकर यादव

इस मंत्र से मन को शांति मिलती है 🌼 -Mukesh Sengupta

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सुदर्शन चक्र शाबर मंत्र

ॐ विष्णु चक्र चक्रौति भार्गवन्ति, सैहस्त्रबाहु चक्रं चक्रं चक्रौती युद्धं नाष्यटष्य नाष्टष्य चल चक्र, चक्रयामि चक्रयामि. काल चक्रं भारं उन्नतै करियन्ति करियन्ति भास्यामि भास्यामि अड़तालिशियं भुजगेन्द्र हारं सुदर्शन चक्रं चलायामि चलायामि भुजा काष्टं फिरयामि फिरयामि भूर्व : भूवः स्वः जमुष्ठे जमुष्ठे चलयामि रुद्र ब्रह्म अंगुलानि ब्रासमति ब्रासमति करियन्ति यमामी यमामी ।

कुंडेश्वर महादेव का मंत्र

कुंडेश्वर महादेव की आरादना ॐ नमः शिवाय - इस पंचाक्षर मंत्र से या ॐ कुण्डेश्वराय नमः - इस नाम मंत्र से की जा सकती है।

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रामायण मीमांसा - इस ग्रन्थ के रचयिता कौन हैं ?

ॐ श्रीगुरुभ्यो नमः हरिःॐ संहितापाठः त्र्यंबकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्। पदपाठः त्र्यंबकमिति त्रि-अम्बकम्। यजामहे। सुगन्धिमिति सु-गन्धिम्। पुष्टिवर्धन....

ॐ श्रीगुरुभ्यो नमः हरिःॐ
संहितापाठः
त्र्यंबकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।
पदपाठः
त्र्यंबकमिति त्रि-अम्बकम्। यजामहे। सुगन्धिमिति सु-गन्धिम्। पुष्टिवर्धनमिति पुष्टि-वर्धनम्। उर्वारुकम्। इव। बन्धनात्। मृत्योः। मुक्षीय। मा। अमृतात्।
क्रमपाठः
त्र्यंबकं यजामहे। त्र्यंबकमिति त्रि-अम्बकम्। यजामहे सुगन्धिम्। सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। सुगन्धिमिति सु-गन्धिम्। पुष्टिवर्धनमिति पुष्टि-वर्धनम्। उर्वारुकमिव। इव बन्धनात्। बन्धनान्मृत्योः। मृत्योर्मुक्षीय। मुक्षीय मा। माऽमृतात्। अमृतादित्यमृतात्।
जटापाठः
त्र्यंबकं यजामहे यजामहे त्र्यंबकन्त्र्यंबकं यजामहे। त्र्यंबकमिति त्रि-अम्बकम्। यजामहे सुगन्धिं सुगन्धिं यजामहे यजामहे सुगन्धिम्। सुगन्धिं पुष्टिवर्धनं पुष्टिवर्धनं सुगन्धिं सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। सुगन्धिमिति सु-गन्धिम्। पुष्टिवर्धनमिति पुष्टि-वर्धनम्। उर्वारुकमिवेवोर्वारुकमुर्वारुकमिव। इव बन्धनाद्बन्धनादिवेव बन्धनात्। बन्धनान्मृत्योर्मृत्योर्बन्धनाद्बन्धनान्मृत्योः। मृत्योर्मुक्षीय मुक्षीय मृत्योर्मृत्योर्मुक्षीय। मुक्षीय मा मा मुक्षीय मुक्षीय मा। माऽमृतादमृतान्मा माऽमृतात्। अमृतादित्यमृतात्।
घनपाठः
त्र्यंबकं यजामहे यजामहे त्र्यंबकन्त्र्यंबकं यजामहे सुगन्धिं सुगन्धिं यजामहे त्र्यंबकं त्र्यंबकं यजामहे सुगन्धिम्। त्र्यंबकमिति त्रि-अम्बकम्। यजामहे सुगन्धिं सुगन्धिं यजामहे यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनं पुष्टिवर्धनं सुगन्धिं यजामहे यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। सुगन्धिं पुष्टिवर्धनं पुष्टिवर्धनं सुगन्धिं सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। सुगन्धिमिति सु-गन्धिम्। पुष्टिवर्धनमिति पुष्टि-वर्धनम्। उर्वारुकमिवेवोर्वारुकमुर्वारुकमिव बन्धनाद्बन्धनादिवोर्वारुकमुर्वारुकमिव बन्धनात्। इव बन्धनाद्बन्धनादिवेव बन्धनान्मृत्युर्मृत्योर्बन्धनादिवेव बन्धनान्मृत्योः। बन्धनान्मृत्योर्मृत्योर्बन्धनाद्बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मुक्षीय मृत्योर्बन्धनाद्बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय। मृत्योर्मुक्षीय मुक्षीय मृत्योर्मृत्योर्मुक्षीय मा मा मुक्षीय मृत्योर्मृत्योर्मुक्षीय मा। मुक्षीय मा मा मुक्षीय मुक्षीय माऽमृतादमृतान्मा मुक्षीय मुक्षीय माऽमृतात्। माऽमृतादमृतान्मा माऽमृतात्। अमृतादित्यमृतात्।
हरिःॐ

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