सुरक्षा के लिए भैरव मंत्र

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श्री गंगाजी के दर्शन का फल

अग्निपुराण में कहा है जो गंगाजी का दर्शन, स्पर्श, जलपान या मात्र गंगा नाम का उच्चार करता है वह अपनी सैकडों हजारों पीढियों के लोगों को पवित्र कर देता है।

शिव शाबर मंत्र क्या है?

ॐ आद भैरव, जुगाद भैरव। भैरव है सब थाई भैरों ब्रह्मा । भैरों विष्ण, भैरों ही भोला साईं । भैरों देवी, भैरों सब देवता । भैरों सिद्धि भैरों नाथ भैरों गुरु । भैरों पीर, भैरों ज्ञान, भैरों ध्यान, भैरों योग-वैराग भैरों बिन होय, ना रक्षा, भैरों बिन बजे ना नाद। काल भैरव, विकराल भैरव । घोर भैरों, अघोर भैरों, भैरों की महिमा अपरम्पार श्वेत वस्त्र, श्वेत जटाधारी । हत्थ में मुगदर श्वान की सवारी। सार की जंजीर, लोहे का कड़ा। जहाँ सिमरुँ, भैरों बाबा हाजिर खड़ा । चले मन्त्र, फुरे वाचा देखाँ, आद भैरो ! तेरे इल्मी चोट का तमाशा ।

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हमाती संस्कृति के अनुसार भोजन कैसे करना चाहिये ?

ॐ नमो भगवते विजयभैरवाय प्रलयान्तकाय महाभैरवीपतये महाभैरवाय सर्वविघ्ननिवारणाय शक्तिधराय चक्रपाणये वटमूलसन्निषण्णाय अखिलगणनायकाय आपदुद्धारणाय आकर्षयाकर्षय आवेशयावेशय मोहय मोहय भ्रामय भ्रामय भाषय भाषय शीघ्रं भाषय ह्रां ....

ॐ नमो भगवते विजयभैरवाय प्रलयान्तकाय महाभैरवीपतये महाभैरवाय सर्वविघ्ननिवारणाय शक्तिधराय चक्रपाणये वटमूलसन्निषण्णाय अखिलगणनायकाय आपदुद्धारणाय आकर्षयाकर्षय आवेशयावेशय मोहय मोहय भ्रामय भ्रामय भाषय भाषय शीघ्रं भाषय ह्रां ह्रीं त्रिपुरताण्डवाय अष्टभैरवाय स्वाहा ।

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