भिन्नपदा गायत्री मंत्र और उसके प्रयोग

भिन्नपदा गायत्री मंत्र और उसके प्रयोग

मूल गायत्री मंत्र:
ॐ भूर्भुवः स्वः । तत्सवितुर्वरेण्यं । भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो नः प्रचोदयात्॥

गायत्री मंत्र ब्रह्मास्त्र की मूल शक्ति है। इसका जप सामान्यतः संध्या के समय किया जाता है, लेकिन शास्त्रों में त्वरित फल प्राप्ति के लिए इसके भिन्नपदा रूप का उल्लेख किया गया है। इसमें प्रत्येक चरण के बीच विशिष्ट बीजाक्षरों को जोड़ा जाता है।

1. शांति और कष्ट निवारण हेतु

ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्

2. बुद्धि और ज्ञान प्राप्ति के लिए

ॐ भूर्भुवः स्वः ऐं तत्सवितुर्वरेण्यं ऐं भर्गो देवस्य धीमहि ऐं धियो यो नः प्रचोदयात् ऐं

3. धन और समृद्धि के लिए

ॐ भूर्भुवः स्वः श्रीं तत्सवितुर्वरेण्यं श्रीं भर्गो देवस्य धीमहि श्रीं धियो यो नः प्रचोदयात् श्रीं

4. इच्छित फल प्राप्ति हेतु

ॐ भूर्भुवः स्वः ह्रीं तत्सवितुर्वरेण्यं ह्रीं भर्गो देवस्य धीमहि ह्रीं धियो यो नः प्रचोदयात् ह्रीं

5. आकर्षण और प्रभाव बढ़ाने के लिए

ॐ भूर्भुवः स्वः क्लीं तत्सवितुर्वरेण्यं क्लीं भर्गो देवस्य धीमहि क्लीं धियो यो नः प्रचोदयात् क्लीं

6. शत्रु पर विजय के लिए

ॐ भूर्भुवः स्वः क्रीं तत्सवितुर्वरेण्यं क्रीं भर्गो देवस्य धीमहि क्रीं धियो यो नः प्रचोदयात् क्रीं

भिन्नपदा जप में प्रयुक्त बीजाक्षर मंत्र की ऊर्जा को विशेष दिशा देते हैं — जैसे ऐं से बुद्धि का प्रकाश, श्रीं से धन की वृद्धि, ह्रीं से इच्छापूर्ति, क्लीं से आकर्षण और क्रीं से विजय की शक्ति प्राप्त होती है।
भक्ति, शुद्धता और नियमपूर्वक किया गया भिन्नपदा गायत्री जप जीवन के हर क्षेत्र में चमत्कारी परिणाम देता है।

हिन्दी

हिन्दी

विभिन्न विषय

Click on any topic to open

0

Copyright © 2026 | Vedadhara | All Rights Reserved. | Designed & Developed by Claps and Whistles
| | | | |
Vedahdara - Personalize

We use cookies