पूर्णागिरि धाम, टनकपुर

उत्तराखंड के चम्पावत जिले में, टनकपुर के पास ऊँची पहाड़ियों पर स्थित पूर्णागिरि मंदिर शक्ति उपासना का एक प्रमुख केंद्र है। यह मंदिर काली नदी के तट के समीप, प्राकृतिक सौंदर्य से घिरे पर्वतीय क्षेत्र में स्थित है। यहां पहुंचते ही श्रद्धालुओं को भक्ति, आस्था और प्रकृति का अद्भुत संगम अनुभव होता है।

पूर्णागिरि को 108 सिद्ध पीठों में से एक माना जाता है। मान्यता है कि माता सती की नाभि यहां गिरी थी, इसलिए यह स्थान अत्यंत पवित्र माना जाता है। मां पूर्णागिरि को शक्ति का पूर्ण स्वरूप माना जाता है, जो अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। इसी कारण हर वर्ष हजारों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं।

चैत्र नवरात्र के समय यहां भव्य मेला लगता है, जिसे पूर्णागिरि मेला कहा जाता है। इस दौरान उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और नेपाल से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। मंदिर तक पहुंचने के लिए पहाड़ी मार्ग से लगभग 3 से 4 किलोमीटर की चढ़ाई करनी पड़ती है। यह यात्रा कठिन जरूर है, लेकिन भक्ति और विश्वास से भरे श्रद्धालु पूरे उत्साह के साथ यह मार्ग तय करते हैं।

मंदिर परिसर से काली नदी और आसपास की घाटियों का दृश्य अत्यंत मनमोहक दिखाई देता है। सूर्योदय और सूर्यास्त के समय यहां का वातावरण विशेष रूप से आध्यात्मिक और शांतिपूर्ण होता है। भक्तजन नारियल, चुनरी और प्रसाद अर्पित कर माता का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

टनकपुर स्वयं एक महत्वपूर्ण नगर है, जो उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की सीमा के पास स्थित है। यहां रेल और सड़क मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है। टनकपुर से पूर्णागिरि मंदिर के लिए वाहन और पैदल मार्ग दोनों उपलब्ध हैं।

पूर्णागिरि केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि आस्था, साहस और समर्पण का प्रतीक है। यहां की यात्रा मन को शुद्ध करती है और जीवन में नई ऊर्जा भर देती है। प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक शक्ति का यह संगम श्रद्धालुओं को बार-बार अपनी ओर आकर्षित करता है।

हिन्दी

हिन्दी

मंदिर

Click on any topic to open

0

Copyright © 2026 | Vedadhara | All Rights Reserved. | Designed & Developed by Claps and Whistles
| | | | |
Vedahdara - Personalize

We use cookies