पाँच दोस्त और पाँच गलतियाँ

एक शहर में पाँच पक्के दोस्त रहते थे - आकाश, विवेक, सुमित, राहुल और मयंक। वे हर शाम पार्क में मिलते थे और अपने दिल की हर बात एक-दूसरे से साझा करते थे। उन्हें लगता था कि दोस्ती में कुछ भी छिपाना गलत है, लेकिन वे यह भूल गए कि कुछ बातें केवल अपने तक ही सीमित रखनी चाहिए।
उस शाम, उन सबने एक-एक करके अपनी वह बात बताई जो गुप्त रहनी चाहिए थी।

1. आकाश
आकाश ने दुखी होकर बताया, 'यार, शेयर मार्केट में मेरा सारा निवेश डूब गया। अब मेरे पास बैंक बैलेंस के नाम पर कुछ नहीं बचा।'
परिणाम: कुछ दिनों बाद जब दोस्तों को कहीं घूमने जाना था, तो उन्होंने आकाश को जानबूझकर नहीं बुलाया। उन्होंने सोचा, 'इसके पास तो पैसे हैं नहीं, हम पर बोझ बनेगा।'

2. विवेक
विवेक अपनी पुरानी नाकामियों को लेकर रोने लगा, 'मैं अंदर से बहुत टूटा हुआ हूँ, मुझे लगता है मैं कभी सफल नहीं हो पाऊंगा।'
परिणाम: जब भी विवेक कोई नया विचार देता, उसके दोस्त उसे गंभीरता से लेने के बजाय कहने लगे, 'तू तो पहले ही हताश है, तू क्या कर पाएगा।' उसकी मानसिक कमजोरी उसके मजाक का कारण बन गई।

3. सुमित
सुमित ने गुस्से में कहा, 'मेरे पिता और भाई के बीच रोज लड़ाई होती है, मेरा घर नरक बन गया है।'
परिणाम: कुछ समय बाद जब सुमित की शादी की बात चली, तो उन्हीं दोस्तों के माध्यम से यह बात मोहल्ले में फ़ैल गई। लोग कहने लगे, 'जिसके घर में पहले से कलेश हो, वहां रिश्ता नहीं करना चाहिए।'

4. राहुल
राहुल ने बताया, 'मेरे व्यापारिक पार्टनर ने मुझे बुद्धू बनाकर दस लाख रुपये ठग लिए।'
परिणाम: राहुल की काबिलियत पर सवाल उठने लगे। लोगों ने उसे 'बेवकूफ' मान लिया जिसे कोई भी ठग सकता है। उसे नए प्रोजेक्ट मिलना बंद हो गए।

5. मयंक
मयंक ने हँसते हुए बताया, 'आज ऑफिस में बॉस ने सबके सामने मुझे बहुत खरी-खोटी सुनाई और मेरी बेइज्जती की।'
परिणाम: धीरे-धीरे दोस्तों के मन में मयंक के लिए जो सम्मान था, वह कम होने लगा। वे भी उसके साथ हल्के में बात करने लगे, क्योंकि उन्हें लगा कि 'इसे तो कोई भी सुना कर चला जाता है।'

निष्कर्ष
कुछ महीनों बाद, उन पाँचों को एहसास हुआ कि उनकी दोस्ती में अब पहले जैसा सम्मान नहीं रहा। उनकी निजी बातें अब उनकी कमजोरी बन चुकी थीं। उन्हें समझ आया कि बुद्धिमान व्यक्ति वही है जो अपनी इन पाँच गोपनीय बातों को अपने दिल के संदूक में बंद रखे। इसलिए चाणक्यनीति में कहा गया है -
'अर्थनाशं मनस्तापं गृहे दुश्चरितानि च |
वञ्चनं चापमानं च मतिमान्न प्रकाशयेत् ||'
धन का नाश, मन का दुख, घर के कलह, किसी के द्वारा दिया गया धोखा और अपना हुआ अपमान—एक बुद्धिमान व्यक्ति को इन पांच बातों को कभी भी दूसरों के सामने प्रकाशित नहीं करना चाहिए।

सीख: आत्मसम्मान बनाए रखने के लिए अपनी कमियों और दुखों का प्रदर्शन सबके सामने नहीं करना चाहिए।

हिन्दी

हिन्दी

बच्चों के लिए

Click on any topic to open

0

Copyright © 2026 | Vedadhara | All Rights Reserved. | Designed & Developed by Claps and Whistles
| | | | |
Vedahdara - Personalize

We use cookies