सामवेद का रुद्र

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यह मंत्र सुख और शांति लाता है 🌸 -siddhi sachdeva

वेदधारा ने मेरे जीवन में बहुत सकारात्मकता और शांति लाई है। सच में आभारी हूँ! 🙏🏻 -Pratik Shinde

कृपया मेरा स्वास्थ्य अच्छा करें🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏 -शिवप्रकाश

भगवान, कृपया मुझे स्वस्थ रखें। कृपया तनाव मुक्त बनायें। कृपया मेरे पूरे परिवार को स्वस्थ रखें -खुशबू

जब भी मैं इस मंत्र को सुनता हूं तो मुझे अच्छा महसूस होता है 🙏🙏🙏🙏 -श्रुति गुप्ता

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इल्वल और वातापी कौन थे?

स्कंद पुराण के अनुसार इल्वल और वातापी ऋषि दुर्वासा और अजमुखी के पुत्र हैं। उन्होंने अपने पिता से कहा कि वे अपनी सारी शक्ति उन्हें दे दें । दुर्वासा को क्रोध आ गया और उन्होंने श्राप दिया कि वे अगस्त्य के हाथों मर जाएंगे।

शिव - शक्ति मंत्र

ॐ ह्रीं नमः शिवाय

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दक्षिण दिशा के पालक देवता कौन है ?

ॐ आवोराजा। नमध्व। रस्यरुद्राम्। हो। ता। राम्। स। त्ययजाऽ३म्। रोदसीयोः। अग्निम्पु। रा। तनयि। त्नोरचित्तात्। हिरण्य। रू। पाऽ३मव। साऽ३४३इ। काऽ३र्णूऽ५ध्वाऽ६५६म्। तद्वौहोवा। गायाऽ२। सुताइसाऽ२३४चा। पुरुहूता। यसत्वा१ऽनाऽ....

ॐ आवोराजा। नमध्व। रस्यरुद्राम्। हो। ता। राम्। स। त्ययजाऽ३म्। रोदसीयोः। अग्निम्पु। रा। तनयि। त्नोरचित्तात्। हिरण्य। रू। पाऽ३मव। साऽ३४३इ। काऽ३र्णूऽ५ध्वाऽ६५६म्।
तद्वौहोवा। गायाऽ२। सुताइसाऽ२३४चा। पुरुहूता। यसत्वा१ऽनाऽ२इ। शंयत्। हा। औऽ३होइ। गाऽ२३४वाइ। नाऽ२शाऽ२३४ औहोवा। एऽ३। किनेऽ२३४५।
तद्वोगाया। सुताइसचाऽ३। पूरूऽ२३हूताऽ३४। हाहोऽ३। यासत्वाऽ२३४नाइ। शंयत्। गौवाओऽ२३४वा। नाऽ२३शाऽ३। काऽ३४५इ। नोऽ६ हाइ।
तद्वोगायसुतेसचाऽ६ए। पुरुहूतायसत्वने। पुरुहूता। यासत्वाऽ२३नाऽ३४इ। शंयत्। गौवाओऽ२३४वा। नाऽ२३शाऽ३। काऽ३४५इनोऽ६ हाइ।
तद्वोगायसुतेसचाऽ६ए। पुरुहूतायसत्वनाइ। शंयद्गाऽ२३वे। ऐऽ२होऽ१आऽ२३इही। नशाऽ२३। काऽ२इनाऽ२३४ऽऔहोवा। ईऽ२३४५।
हाउहाउहाउ। आज्यदोहम्। आज्यदोहम्। आज्यदोहम्। मूर्धानन्दाइ। वाऽ३ अर। तिंपृथिव्याः। वैश्वानराम्। ऋतआ। जातमग्नीम्। कविंसम्रा। जाऽ३मति। थिञ्जनानाम्। आसन्नःपा। त्राऽ३ञ्जन। यन्तदेवाः। हाउहाउहाउ। आज्यदोहम्। आज्यदोहम्। आज्यदोऽ५हाउ। वा। ए। आज्यदोहम्। आज्यदोहम्। ए। आज्यदो हाऽ२३४५म्।
हाउहाउहाउ। हिंचिदोहम्। चिदोहम्। चिदोहम्। मूर्धानन्दाइ। वाऽ३ अर। तिंपृथिव्याः। वैश्वानराम्। ऋतआ। जातमग्नीम्। कविंसम्रा। जाऽ३मति। थिञ्जनानाम्। आसन्नःपा। त्राऽ३ञ्जन। यन्तदेवाः। हाउहाउहाउ। हिंचिदोहम्। चिदोहम्। चिदोऽ३हाउ। वाऽ३। ईऽ२३४५।
हाउहाउहाउ। च्योहम्। च्योहम्। च्योहम्। मूर्धानन्दाइ। वाऽ३ अर। तिंपृथिव्याः। वैश्वानराम्। ऋतआ। जातमग्नीम्। कविंसम्रा। जाऽ३मति। थिञ्जनानाम्। आसन्नःपा। त्राऽ३ञ्जन। यन्तदेवाः। हाउहाउहाउ। च्योहम्। च्योहम्। च्योऽ३हाउ। वाऽ३। एऽ३। ऋतम्।
मन्युनावृत्रहासूर्येणस्वराड्यज्ञेनमघवादक्षिणास्यप्रियातनूराज्ञाविशन्दाधार। वृषभस्त्वष्टावृत्रेणशचीपतिरन्नेनगयःपृथिव्यासृणिकोऽग्निना विश्वंभूतम। भ्यभवोवायुनाविश्वाःप्रजाः अभ्यपवथावषट्कारेणार्द्धभाक्सोमेन सोमपास्समित्यापरमेष्ठी। येदेवादेवाः। दिविषदः। स्थतेभ्योवोदेवादेवेभ्योनमः। येदेवादेवाः। अन्तरिक्षसदः। स्थतेभ्योवोदेवादेवेभ्योनमः। येदेवादेवाः। पृथिवीषदः। स्थतेभ्योवोदेवादेवेभ्योनमः। येदेवादेवाः। अप्सुषदः। स्थतेभ्योवोदेवादेवेभ्योनमः। येदेवादेवाः। दिक्षुसदः। स्थतेभ्योवोदेवादेवेभ्योनमः। येदेवादेवाः। आशासदः। स्थतेभ्योवोदेवादेवेभ्योनमः। अवज्यामिवधन्वनोवितेमन्युन्नयामसिमृडतान्नइह।। अस्मभ्यम्। इडाऽ२३भा। यइदंविश्वंभूतम्। युयोऽ३आउ। वाऽ२३। नाऽ२३४माः।।
अधिप। ताइ। मित्रप। ताइ। क्षत्रप। ताइ। स्वःपताइ। धनपताऽ२इ। नाऽ२माः। नमउत्ततिभ्यश्चोत्तन्वानेभ्यश्च नमोनीषङ्गिभ्यश्चोपवीतिभ्यश्च नमोस्यद्भ्यश्चप्र । तिदधानेभ्यश्चनमः प्रविध्यद्भ्यश्चप्रव्याधिभ्यश्चनमःत्सरद्भ्यश्चत्सारिभ्यश्चनमश्श्रि। तेभ्यश्चश्रायिभ्यश्चनमस्तिष्ठद्भ्यश्चन्यनमोयतेचवियतेचनमःपथेचविपथायच । अवज्यामिवधन्वनोवितेमन्युन्नयामसिमृडतान्नइह।। अस्मभ्यम्। इडाऽ२३भा। यइदंविश्वंभूतम्। युयोऽ३आउ। वाऽ२३। नाऽ२३४माः।।
अधिप। ताइ। मित्रप। ताइ। क्षत्रप। ताइ। स्वःपताइ। धनपताऽ२इ। नाऽ२माः। नमोन्नाय नमोन्नपतय एकाक्षाय चावपन्नदायचनमोनमः। रुद्रायतीरसदेनमःस्थिरायस्थिरधन्वनेनमःप्रतिपदायचपटरिणेचनमस्त्रियम्बकायचक। पर्दिनेचनमआश्रायेभ्यश्चप्रत्याश्रायेभ्यश्चनमः क्रव्येभ्यश्चविरिम्पेभ्यश्च नमस्संवृतेचविवृतेच। अवज्यामिवधन्वनोवितेमन्युन्नयामसिमृडतान्नइह।। अस्मभ्यम्। इडाऽ२३भा। यइदंविश्वंभूतम्। युयोऽ३आउ। वाऽ२३। नाऽ२३४माः।। ॐ।

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