त्यागबुद्धि से किया हुआ कर्म ही फलदायक होता है। अभिमानपूर्वक या अपनी बडाई करने किया हुआ कर्म से कोई फल नहीं मिलता। महाभारत १२.१२.१६

Parv 12 Adhyay 12 Shlok 16

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