जब भी और जहां भी धर्म की ग्लानि और अधर्म की वृद्धि होने पर मैं अवतार लेता हूं और इनको संतुलित कर देता हूँ। भगवद्गीता ४.७-८

Adhyay 4 Shlok 7 Aur 8

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