जब भी और जहां भी धर्म की ग्लानि और अधर्म की वृद्धि होने पर मैं अवतार लेता हूं और इनको संतुलित कर देता हूँ। भगवद्गीता ४.७-८

Adhyay 4 Shlok 7 Aur 8

Copyright © 2022 | Vedadhara | All Rights Reserved. | Designed & Developed by Claps and Whistles
| | | | |
Active Visitors:
3670364