Swarnagauri Stotram By Vighnesh Ghanapaathi

वरां विनायकप्रियां शिवस्पृहानुवर्तिनी-
मनाद्यनन्तसम्भवां सुरान्वितां विशारदाम् |
विशालनेत्ररूपिणीं सदा विभूतिमूर्तिकां 
महाविमानमध्यगां विचित्रितामहं भजे |

निहारिकां नगेशनन्दनन्दिनीं निरिन्द्रियां 
नियन्त्रिकां महेश्वरीं नगां निनादविग्रहाम् |
महापुरप्रवासिनीं यशस्विनीं हितप्रदां 
नवां निराकृतिं रमां निरन्तरां नमाम्यहम् ||

गुणात्मिकां गुहप्रियां चतुर्मुखप्रगर्भजां 
गुणाढ्यकां सुयोगजां हिरण्यवर्णिकामुमाम् |
अगोत्रसंभवां सुरां सुगोमतीं गुणोत्तरां 
गणाग्रणीसुमातरं शिवाSमृतां नमाम्यहम् ||

रविप्रभां सुरम्यकां महासुशैलकन्यकां 
शिवार्धतन्विकामुषां सुधामयीं सरोजगाम् |
सदा हि कीर्तिसंयुतां सुवेदरूपिणीं शिवां 
महासमुद्रवासिनीं सुसुन्दरीमहं भजे || 


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