गृह के मुख्य द्वार की दिशा के अनुसार फल - विघ्नेश घनपाठी


आलेख मे दिये हुए तरीके से घर या क्षेत्र की परिधि को को  हिस्सों में  बाँटें । हर भाग को एक देवता का नाम दिया गया है  और उसके अनुसार फल भी वर्णित है ।


१. शिखि - आग से पीडा


२. पर्जन्य - पुत्री का जन्म​


३. जयन्त - धन की प्राप्ति


४. इन्द्र - अधिकारियों की आनुकूल्यता


५. सूर्य - झगडा


६. सत्य - कपटता


७. भृश - क्रूरता


८. अन्तरिक्ष - चोरी


९. अनिल – अपुत्रता


१०. पूषा - पराधीनता


११. वितथ - अधमता


१२. बृहत्क्षत - सुख और सम्पत्ति


१३. यम – अशुभ / हानि


१४. गन्धर्व - असहायता


१५. भृङ्गराज - दारिद्र्य


१६. मृग - बच्चों का बलक्षय


१७. पिता - बच्चों को कष्ट​


१८. दौवारिक - शत्रु की वृद्धि


१९. सुग्रीव - पुत्र और धन की प्राप्ति


२०. कुसुमदन्त - धन प्राप्ति


२१. वरुण -  धन प्राप्ति


२२. असुर - अधिकारियों से परेशानी


२३. शेष - धन हानि


२४. पापयक्ष्मा - रोग


२५. रोग – मृत्यु


२६. सर्प - शत्रु की वृद्धि


२७. मुख्य - संपत्ति और पुत्र की वृद्धि


२८. भल्लाट - धैर्य और बल​


२९. सोम - पुत्र से धनप्राप्ति


३०. भुजंग - पुत्रों से द्वेष


३१. अदिति - लडकी से परेशानी


३२. दिति – दरिद्रता


गृह निर्माण के समय  अनुकूल दिशा मे ही मुख्य द्वार का स्थापन करें ।


आलेख मे दिये हुए तरीके से घर या क्षेत्र की परिधि को को  हिस्सों में  बाँटें । हर भाग को एक देवता का नाम दिया गया है  और उसके अनुसार फल भी वर्णित है ।



१. शिखि - आग से पीडा



२. पर्जन्य - पुत्री का जन्म​



३. जयन्त - धन की प्राप्ति



४. इन्द्र - अधिकारियों की आनुकूल्यता



५. सूर्य - झगडा



६. सत्य - कपटता



७. भृश - क्रूरता



८. अन्तरिक्ष - चोरी



९. अनिल – अपुत्रता



१०. पूषा - पराधीनता



११. वितथ - अधमता



१२. बृहत्क्षत - सुख और सम्पत्ति



१३. यम – अशुभ / हानि



१४. गन्धर्व - असहायता



१५. भृङ्गराज - दारिद्र्य



१६. मृग - बच्चों का बलक्षय



१७. पिता - बच्चों को कष्ट​



१८. दौवारिक - शत्रु की वृद्धि



१९. सुग्रीव - पुत्र और धन की प्राप्ति



२०. कुसुमदन्त - धन प्राप्ति



२१. वरुण -  धन प्राप्ति



२२. असुर - अधिकारियों से परेशानी



२३. शेष - धन हानि



२४. पापयक्ष्मा - रोग



२५. रोग – मृत्यु



२६. सर्प - शत्रु की वृद्धि



२७. मुख्य - संपत्ति और पुत्र की वृद्धि



२८. भल्लाट - धैर्य और बल​



२९. सोम - पुत्र से धनप्राप्ति



३०. भुजंग - पुत्रों से द्वेष



३१. अदिति - लडकी से परेशानी



३२. दिति – दरिद्रता



गृह निर्माण के समय  अनुकूल दिशा मे ही मुख्य द्वार का स्थापन करें ।


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