क्या हिंदू कई देवताओं की पूजा करते हैं ? - रामस्वामी शास्त्री

ऋग्वेद कहता है -

इन्द्रं मित्रं वरुणमग्निमाहुरथो दिव्यः स सुपर्णो गरुत्मान्।

एकं सद्विप्रा बहुधा वदन्त्यग्निं यमं मातरिश्वानमाहुः ।।

- उस एक ही परमेश्वर को विद्वान लोग अलग-अलग नामों से पुकारतें हैं - इंद्र, अग्नि, यम, वरुण इत्यादि ।

यहां तक ​​कि अगर यज्ञ इंद्र जैसे किसी विशेष देवता के लिए हो, तब भी यज्ञ में समर्णप किया हुआ द्रव्य केवल परमेश्वर के पास ही जाता है ।

तद्यदिदमाहुमुं जामुं यजेत्येकैकं देवमेतस्यैव सा विसृष्टिरे ह्यु सर्वे देवाः

     - बृहदारण्यक उपनिषद

जब वे कहते हैं – इस भगवान की पूजा करो, उस भगवान की पूजा करो, उन सारी पूजाओं द्वारा परमेश्वर की ही पूजा की जाती है । अलग-अलग देवता इस परमेश्वर के अंगभूत हैं। वे सभी एक ही शरीर के अलग अलग अंगों की तरह हैं। एक मुंह से अन्दर जाता हुआ भोजन पूरे शरीर का पोषण करता है। पूरे शरीर में एक ही खून का प्रवाह होता है ।  शरीर के अंगों की तरह सारे देवताओं का भी परपस्पर संबन्ध है । किसी एक देवता की पूजा सारी देवताओं की पूजा के समान है ।


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