अभिजित मुहूर्त



कई अवसरों पर पंचांग द्वारा शुभ मुहूर्त का चुनाव करने का मौका नहीं मिलताया तो पंचांग में शुभ मुहूर्त नहीं रहता है या शुभ मुहूर्त आने तक कार्य रुक नहीं सकता | ऐसे अवसर पर आभिजित मुहूर्त काम आता है ।

‘ अभिजिन्नाम मध्याह्ने मुहूर्तो वैष्णवः स्मृतः ।

  चक्रमादाय भगवान् विष्णुर्दोषान् व्यपोहति ।। ‘

अभिजित् मुहूर्त के दौरान भगवान विष्णु स्वयं अपने सुदर्शन चक्र से सारे मुहूर्त सम्बन्धि दोषों को मिटाते हैं ।

बुधवार छोडकर बाकी के दिनों में अभिजित मुहूर्त निकाला जा सकता है ।

अभिजित मुहूर्त निकालने के लिए सूर्योदय से सूर्यास्त तक दिन की अवधि का पता लगाकर उसको १५ बराबर भागों में विभाजित करना चाहिए ।  सूर्योदय से आठवाँ विभाग अभिजित मुहूर्त कहा जाता है। यह मध्य दोपहर के दोनों तरफ विभक्त होगा। अभिजित मुहूर्त का ठीक बीच का ४ मिनट छोड देना चाहिए ।

उदाहरण:

सूर्योदय ७.०० बजे, सूर्यास्त ५.१५ बजे

दिन की अवधि = ६१५ मिनट

६१५ मिनट / १५ = ४१ मिनट

आठवाँ विभा ७.०० + २८७ मिनट = ११.४७ से 1२.२८ तक

मध्य दोपहर - १२.०७.३०

इसके दोनों तरफ दो दो मिनट: - १२.०५.३० से १२.०९.३० वर्ज्य

इन चार मिनटों को छोड़कर, अभिजित मुहूर्त का ३७ मिनट स्वीकार्य है।


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