सृजन का संक्षेप में वर्णन

सिंहिका दक्ष प्रजापति की बेटी है; अदिति, दिति, दनु, कद्रू और विनता इन सबकी बहन। अदिति आपको पता है देवों की मां है। दिति दैत्यों की मां है। दनु दानवों की माता है। कद्रु सर्पों की मां है। विनता गरुड़, अरुण, तार्क्ष्य, अरिष....

सिंहिका दक्ष प्रजापति की बेटी है; अदिति, दिति, दनु, कद्रू और विनता इन सबकी बहन।
अदिति आपको पता है देवों की मां है।
दिति दैत्यों की मां है।
दनु दानवों की माता है।
कद्रु सर्पों की मां है।
विनता गरुड़, अरुण, तार्क्ष्य, अरिष्टनेमि, आरुणि और वारुणि की माता है।
सिंहिका ने चार पुत्रों को जन्म दिया: राहु, सुचंद्र, चंद्रहर्ता और चंद्रप्रमर्दन।
राहु वही ग्रह है जो सूर्य और चंद्र पर हमला करता रहता है और ग्रहण का कारण बनता है।
राहु की माता और सूर्य की माता बहनें हैं।
इसलिए राहु और सूर्य मौसेरे भाई हुए।

दक्ष की एक अन्य पुत्री क्रोधा हमेशा गुस्से में रहती थी।
उसके पुत्र भी स्वभाव से क्रोधित और क्रूर थे।
उन्हें मिलाकर क्रोधवश गण कहते हैं।

दक्ष की एक और बेटी, दनायु के चार बेटे थे: विक्षर, बल, वीर और वृत्रासुर।

एक और पुत्री काला - उनके पुत्र क्रूर और काल की तरह डरावने थे।
वे थे विनाशन, क्रोध, क्रोधहन्ता, क्रोधशत्रु और कालकेय।

असुरों के गुरु शुक्राचार्य भृगु महर्षि के पुत्र थे।
शुक्राचार्य का एक और नाम था उशना।
शुक्राचार्य के छह पुत्र थे, उनमें से चार नरम और शांत स्वभाव के थे।
वे चारों भी असुरों के पुरोहित बन गए।
असुर - दैत्य, दानव, सिंहिका के पुत्र, क्रोधा के पुत्र इन सब को मिलाकर सामूहिक रूप से कहते हैं।
शुक्राचार्य के दो और पुत्र थे त्वष्टाधर और अत्रि।
वे मरण, स्तम्भन और विद्वेषण जैसे क्रूर कर्मों में निपुण थे।
दक्ष की पुत्री मुनि ने 16 पुत्रों को जन्म दिया - भीमसेन, उग्रसेन, सुपर्ण, वरुण, गोपति, धृतराष्ट्र, सूर्यवर्चस, सत्यवाक, अर्कपर्ण, प्रयुत, भीम, सर्वज्ञ, चित्ररथ, शालिशिर, पर्जन्य, कलि और नारद।
इन्हें देवगंधर्व कहा जाता है।
दक्ष की पुत्री प्राधा ने भी देवगंधर्वों और अप्सराओं को जन्म दिया।
प्राधा की बेटियां भी थी।
एक और बेटी कपिला ने गन्धर्वों, ब्राह्मणों, गायों और अमृत के साथ अप्सराओं को भी जन्म दिया।
इस प्रकार वैशम्पायन ने राजा जनमेजय को देव, असुर, गंधर्व, नाग, अप्सरा, गाय, ब्राह्मण जैसे सभी प्रकार के भूतों की उत्पत्ति का वर्णन बहुत ही संक्षिप्त रूप में किया।
महाभारत में कहा गया है कि अगर आप भूतों की इस उत्पत्ति के बारे में पढेंगे या सुनेंगे तो आपको दीर्घायु, स्वास्थ्य, धन संपत्ति, संतान ये सब मिलेगा और देहांत के बाद सद्गति भी।
महाभारत यही है।
वास्तविक इतिहास, विश्व का वास्तविक इतिहास।
सृष्टि से लेकर विश्व का वास्तविक इतिहास।
महाभारत के अनुसार ब्रह्मा जी के छः मानस पुत्र हैं - मरीचि, अत्रि, अंगिरा, पुलह, पुलस्त्य और क्रतु।
उनका एक और पुत्र था, स्थाणु।
ग्यारह रुद्र स्थाणु के पुत्र हैं।
ग्यारह रुद्र हैं: मृगव्याध, सर्प, निरृति, अजैकपाद, अहिर्बुध्न्य, पिनाकी, दहन, ईश्वर, कपाली, स्थाणु और भव।
ब्रह्मा जी के छह मानस पुत्रों ने अपने - अपने वामशास शुरू कर दिए।
अंगिरा के तीन पुत्र हुए - बृहस्पति, उतथ्य और संवर्त।
देवगुरु बृहस्प्ति अंगिरा के पुत्र हैं।
अत्रि के कई पुत्र थे।
वे सभी बहुत शांतिपूर्ण और निपुण ऋषि थे।
असुरों के बीच, हमने देखा कि दैत्य दिति के पुत्र थे और दानव दानू के पुत्र थे।
राक्षस कौन थे?
राक्षस पुलस्त्य के पुत्र थे।
राक्षसों की उत्पत्ति पुलस्त्य से हुई है।
केवल राक्षस ही नहीं, यक्ष, किन्नर और वानर भी पुलस्त्य से ही उत्पन्न हुए।
पुलह से शेर, बाघ, भेड़िया, किंपुरुष और शारभ उत्पन्न हुए।
हमने वालखिल्य नामक ऋषियों के बारे में पहले भी देखा है।
छोटे छोटे ऋषि जो एक और इंद्र को बनाना चाहते थे क्योंकि इंद्र ने उनका अपमान किया।
गरुड़ के जन्म के पीछे वालखिल्य थे।
गरुड इन्द्र के समान शक्तिशाली था और बाद में पक्षियों के राजा बनाया गाया।
वालखिल्यों की संख्या 60,000 थी।
इनकी उत्पत्ति क्रतू से हुई थी।
ब्रह्मा के दाहिने अंगूठे से दक्ष उत्पन्न हुए और बाएं अंगूठे से दक्ष की पत्नी उत्पन्न हुई।
उन्हें स्त्री - पुरुष के मिलन के माध्यम से वंश को बढाना था।
दक्ष और उनकी पत्नी ने ५० पुत्रियों को जन्म दिया।
पहले के वंश जैसे रुद्र, राक्षस, यक्ष, शेर, बाघ इन सब की उत्पत्ति अलैंगिक थी।
दक्ष की पचास कन्याएँ सब बहुत सुन्दर थीं।
दक्ष के ५००० पुत्र थे, जिन्हें हर्यश्व कहते थे।
उनके १००० और पुत्र थे जिन्हें सबलाश्व कहते थे।
ये सारे नष्ट हो गये।
लेकिन पुत्र रहित का अन्त्येष्टि संस्कार, श्राद्ध इत्यादि कौन करेगा?
आमतौर पर यह माना जाता है कि पुत्र रहित व्यक्ति मृत्यु के बाद सद्गति को प्राप्त नहीं कर सकता।
विधिवत अन्त्येष्टि संस्कार और प्रति वर्ष श्राद्ध करने से ही पितरों को सद्गति मिलती है।
क्या होगा अगर किसी को बेटा नहीं है, सिर्फ बेटी है यां बेटियां है।
अपुत्रोऽनेन विधिना सुतां कुर्वीत पुत्रिकाम्।
यदपत्यं भवेदस्यां तन्मम स्वधाकरम्॥
वह अपनी बेटी को पुत्रीका बना सकता है।
वह पुत्री को पुत्रिका बना सकता है।
इसका अर्थ यह है कि बेटी का बेटा अपने नाना की अन्त्येष्टि और श्राद्ध करने के अधिकार प्राप्त करेगा।
पुत्रिका की इस पद्धति की स्थापना दक्ष ने की थी।
दक्ष ने धर्म को १०, चंद्र को २७ और कश्यप को १३ पुत्रियां दीं, विवाह में।
कश्यप जी की पत्नियों के नाम हम देख चुके हैं।
चंद्र की २७ पत्नियां २७ नक्षत्र हैं।
धर्म की दस पत्नियां हैं: कीर्ति, लक्ष्मी, धृति, मेधा, पुष्टि, श्रद्धा, क्रिया, बुद्धि, लज्जा और मति।
धर्म भी ब्रह्मा जी का ही पुत्र हैं।
स्ताणु, धर्म और दक्ष ये सब ब्रह्मा जी के पुत्र हैं।
लेकिन वे मानस पुत्र नहीं हैं।
उनका जन्म ब्रह्मा जी के अंगों से हुआ।
जिस प्रकार दक्ष का जन्म दाहिने अंगूठे से हुआ था, उसी प्रकार ब्रह्मा के दाहिने छाती से धर्म का जन्म हुआ।
मन से केवल मानस पुत्रों का जन्म हुआ।
आठ वसु धर्म और उनकी पत्नियों के पुत्र हैं।
आठ वसु हैं: धर, ध्रुव, सोम, अह, अनिल, अनल, प्रत्यूष और प्रभास।
विश्वकर्मा प्रभास के पुत्र थे।
विश्वकर्मा की माता वृहस्पति की बहन थी।
कश्यप मरीचि का पुत्र था।
जैसा कि हमने कश्यप से उत्पन्न हुए सभी सूरों और असुरों को देखा था।
सूर्या की पत्नी का नाम था संज्ञा।
संज्ञा ने एक बार घोडी का रूप धारण किया और उस रूप में सूर्य देव के साथ मिलन हुआ।
अश्विनी कुमार उनके पुत्र हैं।
भृगु महर्षि ब्रह्मा जी के सीने से निकलकर बाहर आया।
उनके पुत्र थे कवि।
कवि के पुत्र असुरों का गुरु शुक्राचार्य थे।
शुक्र ही ग्रह के रूप में वर्षा, सूखा, खतरों और उनसे बचाव के लिए जिम्मेदार है।
शुक्राचार्य योग के आचार्य हैं।
च्यवन महर्षि शुक्राचार्य के भाई थे।
आरुषि मनु की पुत्री थी।
वह च्यवन महर्षि की पत्नी है।
उनके पुत्र थे और्व।
और्व का जन्म अपनी मां की जांघ से हुआ था।
और्व के पुत्र थे ऋचीक
ऋचीक के पुत्र जमदग्नि।
जमदग्नि के पुत्र परशुराम।
ब्रह्मा जी के दो और पुत्र हुए - धाता और विधाता।
वे लक्ष्मी देवी के भाई हैं।
अधर्म का जन्म भुखमरी के समय हुआ था।
प्राणी भूख मिटाने के लिए एक - दूसरे को मारने लगे।
निरृति अधर्म की पत्नी थी।
इनके पुत्र थे भय, महाभय और मृत्यु।
मृत्यु यमराज के आदेश से ही जान लेता है।
कश्यप की पत्नी ताम्रा या विश्वा ने पांच पुत्रियों को जन्म दिया: काकी, श्येनी, भासी, धृतराष्ट्री और शुकी।
उल्लू, बाज, मुर्गी, गीध, हंस और तोते जैसे पक्षी इन के बच्चे हैं।
क्रोधवर्षा की नौ बेटियां थीं।
उनसे हिरण, हाथी, भालू, बंदर, शेर, बाघ और अन्य जानवरों का जन्म हुआ।
महाभारत के अनुसार सुरभि क्रोधवशा की कन्या थी।
सुरभि की दो बेटियां थी रोहिणी और गंधर्वी।
गाय और बैल रोहिणी की सन्तान थे और घोड़े गंधर्वी की सन्तान।
रोहिणी की बेटी अनला नारियल जैसे पेड़ों की माँ है।
अरुण और श्येनी ने संपाती और जटायु को जन्म दिया।
कद्रु के अतिरिक्त सुरसा भी नागमाथा थी।
सुरसा के पुत्रों के १०१ फण थे
सुरसा की तीन बेटियां वनस्पतियों वृक्षों और लताओं की माता थीं।

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