सफलं तस्य जीवनम्

वाणी रसवती यस्य यस्य श्रमवती क्रिया|
लक्ष्मी दानवती यस्य सफलं तस्य जीवनम्|

 

जो मधुर मधुर वचन बोलता हो, जो हर काम में मेहनत करता हो, और जो अपने हाथ में आये धन में अधिकतर भाग दूसरों को दान करता हो, उस का जीवम सफल और परिपूर्ण माना जाता है|

 

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रेवती नक्षत्र का मंत्र क्या है?

पूषा रेवत्यन्वेति पन्थाम्। पुष्टिपती पशुपा वाजवस्त्यौ। इमानि हव्या प्रयता जुषाणा। सुगैर्नो यानैरुपयातां यज्ञम्। क्षुद्रान्पशून्रक्षतु रेवती नः। गावो नो अश्वां अन्वेतु पूषा। अन्नं रक्षन्तौ बहुधा विरूपम्। वाजं सनुतां यजमानाय यज्ञम्। (तै.ब्रा.३.१.२)

दक्षिण-पूर्व दिशा में शौचालय

दक्षिण-पूर्व दिशा में केवल स्नानघर बना सकते हैं। यहां कमोड न लगाएं।

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