सद्भिस्तु लीलया प्रोक्तम्

सद्भिस्तु लीलया प्रोक्तं शिलालिखितमक्षरम् |
असद्भिः शपथेनोक्तं जले लिखितमक्षरम् ||

 

सज्जन जो बातों ही बातों में बोलते है उस कार्य को भी कर देते है | वह बात पत्थर में लिखे हुए अक्षर के जैसे होता है | दुर्जन जिस बात को शपथ लेकर भी बोलते है उस कार्य को भी नहीं करते | इस लिए उनकी बात पानी में लिखे हुए अक्षर के जैसे माना जाता है |

 

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वेदधारा के माध्यम से मिले सकारात्मकता और विकास के लिए आभारी हूँ। -Varsha Choudhry

वेदधारा हिंदू धर्म के भविष्य के लिए जो काम कर रहे हैं वह प्रेरणादायक है 🙏🙏 -साहिल पाठक

गुरुजी की शास्त्रों पर अधिकारिकता उल्लेखनीय है, धन्यवाद 🌟 -Tanya Sharma

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कोई भी अनुभव बिना कारण का नहीं होता। श्रीराम जी मानते थे कि कौसल्या माता ने पूर्व जन्म में किसी माता के अपने पुत्र से वियोग करवाया होगा। इसलिए उनको इस जन्म में पुत्र वियोग सहना पडा।

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