यथा ह्येकेन चक्रेण

यथा ह्येकेन चक्रेण न रथस्य गतिर्भवेत् ।
एवं पुरुषकारेण विना दैवं न सिध्यति ॥

 

जिस प्रकार एक ही चक्र से रथ नहीं चल सकता और दोनों चक्र से ही चल पाता है वैसे ही जिस किस का भी भाग्य हो वह भी महनत किये बिना कुछ फल प्राप्त नहीं कर सकता । भाग्य के साथ होते हुए भी उद्यम ही सफलता देता है ।

 

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यज्ञ के लिए अयोग्य देश

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महर्षि मार्कंडेय: भक्ति की शक्ति और अमर जीवन

मार्कंडेय का जन्म ऋषि मृकंडु और उनकी पत्नी मरुद्मति के कई वर्षों की तपस्या के बाद हुआ था। लेकिन, उनका जीवन केवल 16 वर्षों के लिए निर्धारित था। उनके 16वें जन्मदिन पर, मृत्यु के देवता यम उनकी आत्मा लेने आए। मार्कंडेय, जो भगवान शिव के परम भक्त थे, शिवलिंग से लिपटकर श्रद्धा से प्रार्थना करने लगे। उनकी भक्ति से प्रभावित होकर भगवान शिव प्रकट हुए और उन्हें अमर जीवन का वरदान दिया, और यम को पराजित किया। यह कहानी भक्ति की शक्ति और भगवान शिव की कृपा को दर्शाती है।

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पुराणॊं में एक पात्र है जिसका जन्म लडकी के रूप में हुआ था , उसको लडका बना दिया गया , बाद में पुनः लडकी बनी और अंत में हमेशा के लिये पुरुष बन गया ? क्या है उनका नाम ?
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