महाभारत के मुख्य पात्र​

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सियाराम जपना चाहिए कि सीताराम?

सीताराम कहने पर राम में चार मात्रा और सीता में पांच मात्रा होती है। इसके कारण राम नाम में लघुता आ जाती है। सियाराम कहने पर दोनों में तुल्य मात्रा ही होगी। यह ज्यादा उचित है।

संत हमें क्या सिखाते हैं?

संत हमें नि:स्वार्थ, कामना रहित, पवित्र, अभिमान रहित, और सरल जीवन जीना सिखाते हैं। वे हमें ईश्वर में विश्वास के साथ, सत्य और धर्म का आचरण करके, सबसे प्रेम की भावना रखकर, श्रद्धा, क्षमा, मैत्री, दया, करुणा, और प्रसन्नता के साथ आगे बढने की प्रेरणा देते हैं।

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युधिष्ठिर के अलावा धर्मराज ने एक और अवतार लिया था। कौन था वह?

महाभारत के प्रमुख पात्र कौन कौन हैं? यह हम देखते आ रहे हैं। हमने सत्यवती और व्यास के बारे में देखा। भीष्म अष्ट वसुओं में से एक के अवतार थे। वसु आठ देवताओं का एक समूह है, अष्ट वसु। आदित्य, अदिति के पुत्रों की तरह वसु भी दक....

महाभारत के प्रमुख पात्र कौन कौन हैं?
यह हम देखते आ रहे हैं।
हमने सत्यवती और व्यास के बारे में देखा।
भीष्म अष्ट वसुओं में से एक के अवतार थे।
वसु आठ देवताओं का एक समूह है, अष्ट वसु।
आदित्य, अदिति के पुत्रों की तरह वसु भी दक्ष की एक कन्या के पुत्र हैं।
उनका नाम भी वसु था, माता भी वसु, पुत्र भी वसु।
वसुओं के पिता थे धर्मराज।
वसुओं को ऋषि वशिष्ठ ने पृथ्वी पर जन्म लेने के लिए श्राप दिया था।
इन सभी ने गंगा के पुत्र के रूप में जन्म लिया।
स्वयं गंगा ने उनके जन्म लेते ही उनके प्राण छीनकर उन्हें शाप से मुक्ति दिलाई।
उनको केवल जन्म लेना था पृथ्वी पर, रहना नहीं था।
लेकिन उनमें से केवल सात को ही गंगा ने मारा।
आठवां जीवित रहा।
वह था भीष्म।
भीष्म एक वसु के अवतार हैं।
अब, उसी पीढ़ी के दो और, विदुर और सञ्जय।
एक ऋषि थे जिनका नाम था अणिमाण्डव्य।
उन पर एक बार चोरी करने का झूठा आरोप लगाया गया था और मरने के लिए एक भाले के ऊपर चढ़ाया गया था।
जब वे यमलोक गये तो उन्होंने धर्मराज से पूछा।
मेरे साथ ऐसा क्यों हुआ?
मैंने इतनी तपस्या की है।
जहाँ तक मुझे याद है, मेरे द्वारा किया गया एकमात्र पाप यह है कि जब मैं एक बच्चा था तो मैं ने एक चिडिये के बच्चे को एक भूसे से छेद दिया था।
लेकिन इस छोटी सी गुना के लिए इतना बडा दण्ड?
फिर तपस्या करने से क्या लाभ?
आपकी व्यवस्था ही खराब है।
आपकी पद्धति में कोई आनुपातिक न्याय नहीं है।
अणिमाण्डव्य ने यमराज को श्राप दे दिया - आप धरती पर एक दासी का पुत्र बनकर जन्म लोगे।
यह है विदुर।
धर्मराज की तरह विदुर भी धर्म के मूर्तिमान रूप थे।
इसका मतलब है कि उस समय यमराज ने दो अवतार लिए; युधिष्ठिर और विदुर के रूप में, लेकिन दो अलग - अलग पीढ़ियां।
संजय सूत थे, सारथी थे।
धृतराष्ट्र का सारथी, बहुत महान, बहुत बुद्धिमान।
संजय मुनियों के बराबर थे।
सूर्यदेव ने कर्ण के रूप में अवतार लिया, सूर्य का एक अंश, सूर्य का एक छोटा सा हिस्सा।
जन्म लेते समय ही कर्ण के शरीर में कवच और कुण्डल थे।
भगवान विष्णु ने श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लिया।
भगवन विष्णु ने ही कृष्ण और बलरान दोनों ही रूप में अवतार लिया।
दोनों ही शास्त्र और युद्ध में निपुण थे।
कृष्ण के दो मित्र थे, सात्यकीऔर कृतवर्मा।
पांडवों और कौरवों के गुरु द्रोण की माता नहीं थी।
ऋषि भारद्वाज का रेत एक पर्वत में एक गुफा में विकसित होकर द्रोणाचार्य बन गया।
द्रोणी का अर्थ है गुफा।
इस तरह उनका नाम द्रोण पड़ा।
द्रोण की पत्नी कौन थी?
कृपी, अश्वत्थामा की माता।
कृपी का भाई कृपाचार्य।
गौतम गोत्र के शरद्वान नामक ऋषि के रेत से बिना माता के ही कृपाचार्य और कृपी का जन्म हुआ।
मैथुनी सृष्टि प्रजनन के तरीकों में से सिर्फ एक है।
प्रारम्भ में ब्रह्म जी किसी प्राणी या वस्तु के बारे में सोचते थे और उसका आविर्भाव होता था।
फिर इस तरह का अलैंगिक प्रजनन होने लगा।
फिर मैथुनी प्रजनन।
धृष्टद्युम्न का जन्म यज्ञाग्नि से हुआ, न कोई पिता और न ही कोई माता।
अग्नि से प्रकट होते समय धृष्टद्युम्न के हाथ में एक धनुष था जो द्रोण का वध करने के लिए था।
द्रौपदी का जन्म भी राजा द्रुपद के इसी यज्ञ वेदी से हुआ था।
शिखंडी द्रुपद की पुत्री थी।
शकुनि गांधार के राजा सुबाल का पुत्र था।
सुबल प्रह्लाद के शिष्य नग्नजित का अवतार था।
गांधारी शकुनि की बहन थी।
धृतराष्ट्र, पाण्डु और विदुर नियोग से व्यास जी के पुत्र थे।
धृतराष्ट्र की माता थी अम्बिका, पाण्डु की माता अम्बालिका और विदुर की माता थी एक नौकरानी।
पांडु की दो पत्नियां थीं कुंती और माद्री।
धर्मराज कुंती के गर्भ से युधिष्ठिर के रूप में अवतार लिये, वायुदेव भीम के रूप में अवतार लिये और इंद्रदेव अर्जुन के रूप में अवतार लिये।
कर्ण के रूप में सूर्यदेव का अवतार हम पहले ही देख चुके हैं।
अश्विनी कुमार नकुल और सहदेव के रूप में माद्री के गर्भ से जन्म लिये।
अश्विनी कुमार सूर्यदेव के पुत्र हैं।
एक सौ कौरव धृतराष्ट्र और गान्धारी से उत्पन्न हुए।
धृतराष्ट्र का एक और पुत्र हुआ युयुत्सु एक वैश्य स्त्री में।
जिस प्रकार क्षत्रिय पिता और ब्राह्मण माता का पुत्र सूत कहलाता है, उसी प्रकार क्षत्रिय पिता और वैश्य स्त्री का पुत्र करण कहलाता है।
युयुत्सु एक करण था।
धृतराष्ट्र के पुत्रों में ग्यारह महारथी थे।
दुर्योधन, दु:शासन, दु:सह, दुर्मर्षण, विकर्ण, चित्रसेन, विविंशति, जय, सत्यव्रत, पुरुमित्र और युयुत्सु।
अर्जुन ने कृष्ण की बहन सुभद्रा से विवाह किया और अभिमन्यु उनका पुत्र था।
पांडवों से द्रौपदी के पांच पुत्र उत्पन्न हुए:
युधिष्ठिर से प्रतिविंध्य, भीम से सुतसोम, अर्जुन से शतकीर्ति, नकुल से शतानीक और सहदेव से श्रुतसेन।
घटोत्कच भीम और उनकी राक्षसी पत्नी हिडिम्बा का पुत्र था।
कुरुक्षेत्र की लड़ाई में सैकड़ों हजारों बहादुर योद्धाओं ने भाग लिया, कई राजा अपनी सेनाओं के साथ।
पर महाभारत के मुख्य पात्र ये सब हैं।

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