विषमश्चित्तनिग्रहः

अप्यब्धिपानान्महतः सुमेरून्मूलनादपि |
अपि वह्न्यशनात् साधो विषमश्चित्तनिग्रहः ||

 

मन को काबू में रखना पूरे सागर को पी जाने से, पर्वत को उखाडकर फेकने से और आग को भोजन के रूप में खाने से से भी ज्यादा कठिन है |

 

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आपका हिंदू शास्त्रों पर ज्ञान प्रेरणादायक है, बहुत धन्यवाद 🙏 -यश दीक्षित

इस परोपकारी कार्य में वेदधारा का समर्थन करते हुए खुशी हो रही है -Ramandeep

वेदधारा के माध्यम से मिले सकारात्मकता और विकास के लिए आभारी हूँ। -Varsha Choudhry

वेद पाठशालाओं और गौशालाओं के लिए आप जो कार्य कर रहे हैं उसे देखकर प्रसन्नता हुई। यह सभी के लिए प्रेरणा है....🙏🙏🙏🙏 -वर्षिणी

वेदधारा की वजह से हमारी संस्कृति फल-फूल रही है 🌸 -हंसिका

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यजुर्वेद से दिव्य मार्गदर्शन

यजुर्वेद का पवित्र आदेश है कि यह चराचरात्मक सृष्टि परमेश्वर से व्याप्य है, जो सर्वाधार, सर्वनियन्ता, सर्वाधिपति, सर्वशक्तिमान, सर्वज्ञ, और सभी गुणों तथा कल्याण का स्वरूप हैं। इसे समझते हुए, परमेश्वर को सदा अपने साथ रखें, उनका निरंतर स्मरण करें, और इस जगत में त्यागभाव से केवल आत्मरक्षार्थ कर्म करें तथा इन कर्मों द्वारा विश्वरूप ईश्वर की पूजा करें। अपने मन को सांसारिक मामलों में न उलझने दें; यही आपके कल्याण का मार्ग है। वस्तुतः ये भोग्य पदार्थ किसी के नहीं हैं। अज्ञानवश ही मनुष्य इनमें ममता और आसक्ति करता है। ये सब परमेश्वर के हैं और उन्हीं के लिए इनका उपयोग होना चाहिए। परमेश्वर को समर्पित पदार्थों का उपभोग करें और दूसरों की संपत्ति की आकांक्षा न करें।

तिरुपति बालाजी का मंदिर कहां है?

तिरुपति बालाजी मंदिर आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में है। चेन्नई से दूरी १३३ कि.मी.। हैदराबाद से दूरी ५६० कि.मी.।

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समक‌ालीन विद्व‌ान जिन्होंने अथर्व वेदाध्ययन के पुनरुद्धार के लिये महान प्रयास किया है ?
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