भृगुसंहिता

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आपकी वेबसाइट बहुत ही अनोखी और ज्ञानवर्धक है। 🌈 -श्वेता वर्मा

हिंदू धर्म के पुनरुद्धार और वैदिक गुरुकुलों के समर्थन के लिए आपका कार्य सराहनीय है - राजेश गोयल

🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏 -मदन शर्मा

वेदधारा हिंदू धर्म के भविष्य के लिए जो काम कर रहे हैं वह प्रेरणादायक है 🙏🙏 -साहिल पाठक

वेदधारा की वजह से मेरे जीवन में भारी परिवर्तन और सकारात्मकता आई है। दिल से धन्यवाद! 🙏🏻 -Tanay Bhattacharya

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महर्षि पतंजलि के अनुसार योग के कितने अंग है?

महर्षि पतंजलि के योग शास्त्र में आठ अंग हैं- १.यम २. नियम ३. आसन ४. प्राणायाम ५. प्रत्याहार ६. धारण ७. ध्यान ८. समाधि।

हनुमान जी का नाम हनुमान क्यों पड़ा?

अंजनी पुत्र भूखे थे और आकाश में सूर्य को देखा। उनको लगा कि वह कोई फल होगा और सूर्य की ओर कूदा। यह देखकर इन्द्र को लगा कि सूर्य पर कोई आक्रमण कर रहा है। इन्द्र ने बजरंगबली के हनु (जबडे) पर वज्र से प्रहार किया। उस घाव का चिह्न जबडे पर होने के कारण वे हनुमान कहलाने लगे।

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हनुमान साठिका के रचयिता कौन है?

मेषलग्नान्तरसूर्यफलम्
जिस व्यक्ति का मेप का सूर्य लग्न के पहिले स्थान में हो तो वह मनुष्य महान् विद्वत्ता रखनेवाला और विद्या की आदर्श शक्ति पाने वाला तथा आत्मज्ञान की महानता
पाने वाला और लम्बा कद पाने वाला संतान शक्ति की महातना पाने वाला बड़ा भारी मान पाने वाला तथा बड़ा भारी प्रभाव रखने वाला और दिमाग व देह के अंदर बड़ी तेजी रखने वाला तथा स्त्री स्थान में कुछ कमी पाने वाला तथा स्त्री को कुछ मामूली चीज समझने वाला तथा इन्द्रिय भोगादिक में कुछ कमी व कुछ छिपाव शक्ति पाने वाला और रोजगार की परवाह न करने वाला एवं दैनिक रोज- गार को कुछ मामूली चीज समझने वाला होता है ।
जिस व्यक्ति का वृष का सूर्य लग्न से दूसरे स्थान में हो तो वह मनुष्य विद्या का संग्रह करने में कुछ दिक्कतें महसूस करने वाला और बुद्धि व दिमाग के अंदर कुछ परे- शानी पाने वाला तथा कुछ विद्या के घनयुक्त कर्म से धन प्राप्त करनेवाला और सतान पक्ष में कुछ कमी या रुका - वट का योग पान वाला तथा संतान पक्ष के संबंध में कुछ बंधन के कारण से कुछ फिकर का योग पाने वाला और धन के स्थान में धन की कुछ कमजोरी तथा विद्या का प्रकाश रूपी धनं प्राप्त करने वाला और अपने से छोटे व्यक्तियों क कुछ कुटुम्ब पाने वाला जीवन की दिनचर्या में व पुरातत्त्व के संबंध में आनन्द अनुभव करने वाला होता है । जिस व्यक्ति का मिथुन का सूर्य लग्न से तीसरे स्थान में हो तो वह मनुष्य बुद्धि बल की शक्ति के द्वारा बड़ा प्रताप पाने वाला तथा विद्या ग्रहण करने वाला संतान की बड़ी शक्ति पाने वाला और वाणी की शक्ति का बड़ा प्रभाव रखने वाला भुजाओं का बल रखने वाला और - दिमाग को ताकत से उन्नति के मार्ग में बड़ी दौड़धूप करके उन्नति को प्राप्त करने वाला तथा भाई की शक्तिपाने वाला और भाग्य की उन्नति करने वाला तथा धर्मको मानने बाला और ईश्वर में विश्वास रखने वाला तथा महान हिम्मत वाला तथा बोल चाल के अंदर वीरत्व रखने वाला होता है ।
जिस व्यक्ति का कर्क का सूर्य लग्न से चौथे स्थान में हो तो वह मनुष्य विद्या ग्रहण करने वाला व सुख पूर्वक विद्या अध्ययन करने ११ वाला और विद्या से सुख प्राप्त करने वाला सतान का सुख प्राप्त करने वाला मीठा और प्रभावशाली बोलने वाला माता के गुणों और सुख को प्राप्त करन वाला तथा विद्या बुद्धि के योग से कुछ भूमि के सुख में वृद्धि पाने वाला पिता स्थान में कुछ अरुचि रखने वाला तथा उन्नति के मार्ग में बुद्धि के द्वारा कुछ शिथिलता पाने वाला और राज समाज के संबंध में कुछ वैमनस्यता का भाव रखने वाला तथा घर के अंदर बुद्धि के कारण प्रकाश रखने वाला होता है ।
जिस व्यक्ति का सिंह का सूर्य लग्न से पांचवें स्थान में हो तो वह मनुष्य महान् विद्या को प्राप्त करने वाला बड़ा प्रभावशाली वोलनं. वाल और बुद्धि के अदर बड़ा भारी प्रताप पाने वाला तथा, बड़ा दूरदेश का विचार रखने वाला संतान पक्ष कीशक्ति पाने वाला तथा संतानपक्ष से बड़ा भारी प्रभाव पाने वाला और आमदनी के स्थान में, कुछ कमी व आमदनी के मार्ग में कुछ अरुचि रखने वाला और अपनी वाणी की ताकत से दूसरों को दबाव पहुचाने वाला और आमदनी की वृद्धि करने के लिये बुद्धि की विशेष शक्ति का प्रयोगकरने वाला और अपने दिमाग की शक्तिके सामने सब की दिमाग शक्तिको छोटा समझनेवाला होता है ।

Ramaswamy Sastry and Vighnesh Ghanapaathi

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