बटुक भैरव आरती

batuk bhairav

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जय भैरव देवा प्रभु जय भैरव देवा, 

सुर नर मुनि सब करते प्रभु तुम्हरी सेवा।

 

तुम पाप उद्धारक दुःख सिन्धु तारक, 

भक्तों के सुखकारक भीषण वपु धारक ।

 

वाहन श्वान विराजत कर त्रिशूल धारी, 

महिमा अमित तुम्हारी जय जय भयहारी ।

 

तुम बिन शिव सेवा सफल नहीं होवे, 

चतुर्वतिका दीपक दर्शन दुःख खोवे॥

 

तेल चटकि दधि मिश्रित भाषावलि तेरी, 

कृपा कीजिये भैरव करिये नहिं देरी ॥

 

पाँवों घुंघरू बाजत डमरू डमकावत, 

बटुकनाथ बन बालक जन मन हरषावत ॥

 

बटुक नाथ की आरती जो कोई नर गावे, 

कहे धरणीधर वह मन वांछित फल पावे॥

 

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२१,८७० रथ, २१,८७० हाथी, ६५, ६१० घुड़सवार एवं १,०९,३५० पैदल सैनिकों के समूह को अक्षौहिणी कहते हैं।

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