प्रारब्धमुत्तमजना न परित्यजन्ति

प्रारभ्यते न खलु विघ्नभयेन नीचैः
प्रारभ्य विघ्नविहता विरमन्ति मध्याः|
विघ्नैः पुनः पुनरपि प्रतिहन्यमानाः
प्रारब्धमुत्तमजना न परित्यजन्ति|

 

इस संसार में तीन श्रेणी के लोग होते हैं| तीसरे श्रेणी के लोग कार्य में बाधा आ जाएगी इस डर के कारण से किसी भी कार्य की शुरुआत नहीं करते| दूसरे श्रेणी के लोग कार्य की शुरुआत कर के फिर बाधाओं के आने के बाद उस कार्य को बीच मे ही छोड देते हैं| और पहले व उत्तम श्रेणी के लोग वें होतें हैं, जो हजारों बाधाओं के आने पर भी अपने द्वारा प्रारंभ किये कार्य को सफलता के साथ समाप्त करते हैं|

 

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इल्वल और वातापी कौन थे?

स्कंद पुराण के अनुसार इल्वल और वातापी ऋषि दुर्वासा और अजमुखी के पुत्र हैं। उन्होंने अपने पिता से कहा कि वे अपनी सारी शक्ति उन्हें दे दें । दुर्वासा को क्रोध आ गया और उन्होंने श्राप दिया कि वे अगस्त्य के हाथों मर जाएंगे।

खेती की उपज बढाने का मंत्र क्या है?

ॐ आरिक्षीणियम् वनस्पतियायाम् नमः । बहुतेन्द्रीयम् ब्रहत् ब्रहत् आनन्दीतम् नमः । पारवितम नमामी नमः । सूर्य चन्द्र नमायामि नमः । फुलजामिणी वनस्पतियायाम् नमः । आत्मानियामानि सद् सदु नमः । ब्रम्ह विषणु शिवम् नमः । पवित्र पावन जलम नमः । पवन आदि रघुनन्दम नमः । इति सिद्धम् ।

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अपनी शिव भक्ति से मृत्यु को किसने हराया था ?
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