दुर्गा सूक्त

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हरबार जब मैं इन मंत्रों को सुनता हूँ, तो मुझे बहुत शांति मिलती है -प्रकाश मिश्रा

वेदधारा के माध्यम से मिले सकारात्मकता और विकास के लिए आभारी हूँ। -Varsha Choudhry

वेद पाठशालाओं और गौशालाओं के लिए आप जो अच्छा काम कर रहे हैं, उसे देखकर बहुत खुशी हुई 🙏🙏🙏 -विजय मिश्रा

इस मंत्र से दिल में शांति मिलती है 🕊️ -सारांश शाह

सनातन धर्म के भविष्य के लिए वेदधारा के नेक कार्य से जुड़कर खुशी महसूस हो रही है -शशांक सिंह

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श्रीकृष्ण के संग की प्राप्ति

श्रीकृष्ण के संग पाने के लिए श्री राधारानी की सेवा, वृन्दावन की सेवा और भगवान के भक्तों की सेवा अत्यन्त आवश्यक हैं। इनको किए बिना श्री राधामाधव को पाना केवल दुराशा मात्र है।

चार्वाक दर्शन में सुख किसको कहते हैं?

चार्वाक दर्शन में सुख शरीरात्मा का एक स्वतंत्र गुण है। दुख के अभाव को चार्वाक दर्शन सुख नहीं मानता है।

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किस नदी में कुंती ने कर्ण को बहा दिया था ?

ॐ जातवेदसे सुनवाम सोम मरातीयतो निदहाति वेदः । स नः पर्षदति दुर्गाणि विश्वा नावेव सिन्धुं दुरिताऽत्यग्निः ॥ तामग्निवर्णां तपसा ज्वलन्तीं वैरोचनीं कर्मफलेषु जुष्टाम् । दुर्गां देवीग्ं शरणमहं प्रपद्ये सुतरसि तरसे नम....

ॐ जातवेदसे सुनवाम सोम मरातीयतो निदहाति वेदः ।
स नः पर्षदति दुर्गाणि विश्वा नावेव सिन्धुं दुरिताऽत्यग्निः ॥
तामग्निवर्णां तपसा ज्वलन्तीं वैरोचनीं कर्मफलेषु जुष्टाम् ।
दुर्गां देवीग्ं शरणमहं प्रपद्ये सुतरसि तरसे नमः ॥
अग्ने त्वं पारया नव्यो अस्मान्थ्स्वस्तिभिरति दुर्गाणि विश्वा ।
पूश्च पृथ्वी बहुला न उर्वी भवा तोकाय तनयाय शंयोः ॥
विश्वानि नो दुर्गहा जातवेदः सिन्धुन्न नावा दुरिताऽतिपर्षि ।
अग्ने अत्रिवन्मनसा गृणानोऽस्माकं बोध्यविता तनूनाम् ॥
पृतना जितग्ं सहमानमुग्रमग्निग्ं हुवेम परमाथ्सधस्थात् ।
स नः पर्षदति दुर्गाणि विश्वा क्षामद्देवो अति दुरिताऽत्यग्निः ॥
प्रत्नोषि कमीड्यो अध्वरेषु सनाच्च होता नव्यश्च सत्सि ।
स्वाञ्चाऽग्ने तनुवं पिप्रयस्वास्मभ्यं च सौभगमायजस्व ॥
गोभिर्जुष्टमयुजो निषिक्तं तवेन्द्र विष्णोरनुसञ्चरेम ।
नाकस्य पृष्ठमभि संवसानो वैष्णवीं लोक इह मादयन्ताम् ॥
कात्यायनाय विद्महे कन्यकुमारि धीमहि ।
तन्नो दुर्गिः प्रचोदयात् ॥

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