किं किं न साधयति कल्पलतेव विद्या

मातेव रक्षति पितेव हिते नियुङ्क्ते
कान्तेव चाऽपि रमयत्यपनीय खेदम्|
लक्ष्मीं तनोति वितनोति च दिक्षु कीर्तिं
किं किं न साधयति कल्पलतेव विद्या|

 

विद्या माता की तरह पालन पोषण करती है| विद्या पिता की तरह अच्छा मार्गदर्शन करती है| विद्या पत्नी की तरह दुःख को दूर कर के सुख देती है| विद्या लक्ष्मी को बढाती है| विद्या चारों दिशाओं मे कीर्ति प्राप्त कराती‌ है| यह विद्या एक कल्पवृक्ष की तरह है| ये क्या क्या नहीं कर सकती?

 

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आपके प्रवचन हमेशा सही दिशा दिखाते हैं। 👍 -स्नेहा राकेश

वेद पाठशालाओं और गौशालाओं के लिए आप जो कार्य कर रहे हैं उसे देखकर प्रसन्नता हुई। यह सभी के लिए प्रेरणा है....🙏🙏🙏🙏 -वर्षिणी

आपकी वेबसाइट से बहुत कुछ जानने को मिलता है।🕉️🕉️ -नंदिता चौधरी

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घर के लिए कौन सा शिव लिंग सबसे अच्छा है?

घर में पूजा के लिए सबसे अच्छा शिव लिंग नर्मदा नदी से प्राप्त बाण लिंग है। इसकी ऊंचाई यजमान के अंगूठे की लंबाई से अधिक होनी चाहिए। उत्तम धातु से पीठ बनाकर उसके ऊपर लिंग को स्थापित करके पूजा की जाती है।

स्त्रीधन के बारे में वेदों में कहां उल्लेख है?

ऋग्वेद मण्डल १०. सूक्त ८५ में स्त्रीधन का उल्लेख है। वेद में स्त्रीधन के लिए शब्द है- वहतु। इस सूक्त में सूर्यदेव का अपनी पुत्री को वहतु के साथ विदा करने का उल्लेख है।

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