ज्ञानेन हीनाः पशुभिः समानाः

आहारनिद्राभयमैथुनानि समानमेतत् पशुभिर्नराणाम् |
ज्ञानं हि तेषामधिको विशेषो ज्ञानेन हीनाः पशुभिः समानाः ||

 

भोजन करना, सोना, डरना और संतान पैदा करना - ये सब मनुष्य भी करते हैं और पशु पक्षियां भी करती हैं | तो वह क्या है जो मनुष्य को खास बनाता है ? वह है ज्ञान | इसलिए जो लोग ज्ञान को प्राप्त करने की इच्छा नहीं रखते हैं वे पशु के समान ही होते हैं |

 

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शिव पुराण के अनुसार भस्म लगाने के लिए कौन से स्थान अनुशंसित हैं?

शिव पुराण में माथे, दोनों हाथों, छाती और नाभि पर भस्म लगाने की सलाह दी गई है।

पुराण के कितने कल्प हैं?

पुराणशास्त्र के चार कल्प हैं: १. वैदिक कल्प २. वेदव्यासीय कल्प ३. लोमहर्षणीय कल्प ४. औग्रश्रवस कल्प

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