संतान की रक्षा और लंबी उम्र के लिए मंत्र

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दीर्घायु, सुख, शांति, वैभव, संतान की दीर्घायु, रक्षा, बुद्धि, विद्या, विघ्न विमुक्ति, शत्रु विमुक्ति, श्रॉफ मुक्ति के लिए प्रार्थना करता हूं। -शिवम

वेदधारा के माध्यम से हिंदू धर्म के भविष्य को संरक्षित करने के लिए आपका समर्पण वास्तव में सराहनीय है -अभिषेक सोलंकी

यह वेबसाइट बहुत ही शिक्षाप्रद और विशेष है। -विक्रांत वर्मा

वेदधारा मंत्रों ने मुझे नई ऊर्जा दी है। -Dr Pankaj Rastogi

कृपया मेरा स्वास्थ्य अच्छा करें🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏 -शिवप्रकाश

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बुध की पत्नी कौन है?

इला। इला पैदा हुई थी लडकी। वसिष्ठ महर्षि ने इला का लिंग बदलकर पुरुष कर दिया और इला बन गई सुद्युम्न। सुद्युम्न बाद में एक शाप वश फिर से स्त्री बन गया। उस समय बुध के साथ विवाह संपन्न हुआ था।

गृह्यसूत्र

गृह्यसूत्र वेदों का एक हिस्सा है, जिसमें परिवार और घरेलू जीवन से संबंधित संस्कारों, अनुष्ठानों, और नियमों का विवरण होता है। यह वैदिक काल के सामाजिक और धार्मिक जीवन के महत्वपूर्ण पहलुओं को दर्शाता है। गृह्यसूत्रों में विभिन्न प्रकार के संस्कारों का वर्णन है, जैसे कि जन्म, नामकरण, अन्नप्राशन (पहली बार अन्न ग्रहण करना), उपनयन (यज्ञोपवीत संस्कार), विवाह, और अंत्येष्टि (अंतिम संस्कार) आदि। ये संस्कार जीवन के प्रत्येक महत्वपूर्ण चरण को चिह्नित करते हैं। प्रमुख गृह्यसूत्रों में आश्वलायन गृह्यसूत्र, पारस्कर गृह्यसूत्र, और आपस्तंब गृह्यसूत्र शामिल हैं। ये ग्रंथ विभिन्न ऋषियों द्वारा रचित हैं और विभिन्न वैदिक शाखाओं से संबंधित हैं।गृह्यसूत्रों का धार्मिक महत्व बहुत अधिक है क्योंकि ये न केवल व्यक्तिगत जीवन के संस्कारों का विवरण प्रदान करते हैं बल्कि समाज में धार्मिक और नैतिक मानकों की स्थापना भी करते हैं।

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यज्ञ से सबंधित वास्तु ग्रंथ कौन सा है ?

लंबोदर महाभाग, सर्वोप्रदवनाशन । त्वत्प्रसादादविघ्नेश, चिरं जीवतु बालकः ॥ जननी सर्वभूतानां, बालानां च विशेषतः । नारायणीस्वरुपेण, बालं मे रक्ष सर्वदा ॥ भूतप्रेतपिशाचेभ्यो, डाकिनी योगिनीषु च । मातेव रक्ष बालं मे, श्....

लंबोदर महाभाग, सर्वोप्रदवनाशन ।
त्वत्प्रसादादविघ्नेश, चिरं जीवतु बालकः ॥
जननी सर्वभूतानां, बालानां च विशेषतः ।
नारायणीस्वरुपेण, बालं मे रक्ष सर्वदा ॥
भूतप्रेतपिशाचेभ्यो, डाकिनी योगिनीषु च ।
मातेव रक्ष बालं मे, श्वापदे पन्नगेषु च ॥

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